वाह: पहले रेमेडिसिवर की हुयी कालाबाजारी अब बरेली की बाजार से ब्लैक फंगस का ये इंजेक्शन भी गायब

लाइपोसोमेल एंफोटेरिसिन-बी इंजेक्शन का स्टाक मेडिकल स्टोरों में बेहद मुश्किल हुआ

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न्‍यूज टुडे नेटवर्क। लाइपोसोमेल एंफोटेरिसिन-बी इंजेक्शन का नाम फार्मा लाइन से जुड़े लोगों ने भी बहुत कम ही सुना होगा, लेकिन पिछले कुछ दिनों से इस इंजेक्शन की मांग तेजी से बढ़ गई है। दरअसल, यह इजेंक्शन ब्लैक फंगस के इलाज में काम आता है। चूंकि, पहले ब्लैक फंगस के केस न के बराबर थे, लेकिन पोस्ट कोविड के मरीजों में यह समस्या लगातार बढ़ रही है।

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जिले में करीब दर्जन भर केस सामने आ चुके हैं। ऐसे में इंजेक्शन बाजार से बहुत जल्द गायब हो गए। वहीं, ब्लैक फंगस के केस बढ़ने की भनक कालाबाजारी करने वालों को लगी तो नई सप्लाई बाजार से गायब करने की योजना बनने लगी। हालांकि प्रशासन ने रेमडेसिविर की कालाबाजारी से सबक लेते हुए इस बार इंजेक्शन सप्लाई और खपत पर नजर रखने की तैयारी कर ली है।

महानगर केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष दुर्गेश खटवानी ने बताया कि बाजार में पहले लाइपोसोमेल एंफोटेरिसिन-बी इंजेक्शन की मांग काफी कम थी। इस वजह से चुनिंदा स्टोर पर बेहद सीमित मात्रा में यह इंजेक्शन रहता था। अब डिमांड तेज हुई है। इसलिए बाजार में इंजेक्शन खत्म हो गए हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.एसके गर्ग ने बताया कि जिन डेडिकेटेड कोविड अस्पतालों में ब्लैक फंगस का इलाज हो रहा है, वहां शासन की ओर से एंफोटेरिसिन-बी इंजेक्शन पहुंचाया जा रहा है। बुधवार को कुछ सप्लाई सीएमएसडी के जरिए एसआरएमएस मेडिकल कालेज तक भेजी भी गई है।

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जिले से दिल्ली भी जा रहे इंजेक्शन : दवा व्यापारी बताते हैं कि पहले बेहद कम मांग के चलते लाइपोसोमेल एंफोटेरिसिन-बी इंजेक्शन एक्सपायर भी हो जाते थे। या फिर कई बार इंजेक्शन वापस तक करने की नौबत भी आ जाती थी। लेकिन अब दिल्ली से भी मरीजों के लिए यहां से इंजेक्शन भेजे गए हैं।  बाजार में बाहर से मरीजों के पर्चे जिले के केमिस्ट स्टोर पर पहुंचे।