सरकार को चेतावनी: मांगें नहीं मानीं तो 27 सितंबर को विधानसभा पर गरजेंगे एससी और ओबीसी प्रदर्शनकारी

पिछले 84 दिन से राजधानी लखनऊ में धरना प्रदर्शन जारी है

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न्‍यूज टुडे नेटवर्क। यूपी की राजधानी लखनऊ में एससी और ओबीसी आरक्षण को सही ढंग से लागू ना करने क आरोप के साथ प्रदर्शनकारी धरना दे रह हैं। पिछले 84 दिन से ये धरना प्रदर्शन चल रहा है। अब आंदोलनकारियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि जल्‍द उनकी मांगों पर फैसला नहीं हुआ तो वे 27 सितंबर को विधानसभा घेराव करेंगे। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया हैं कि ओबीसी और एसी वर्ग की करीब 20 हजार सीट दूसरे समुदाय के लोगों को दे दी गई है। इसकी वजह से वह लोग नौकरी से वंचित हैं। प्रदर्शनकारी ओबीसी में 27 फीसदी और एससी में 21 फीसदी आरक्षण व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि इस व्यवस्था को गलत तरीके से लागू किया गया है, जिसकी वजह से हजारों लोगों की नौकरी चली गई है।

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मोर्चा के पदाधिकारी विजय यादव ने आरोप लगाया है कि ओबीसी और एससी कोटे की सीट पर ठीक से चयन नहीं हुआ है। इसकी वजह से करीब 22 हजार सीट पर धांधली हुई है। इस दौरान 27 सितंबर तक मांग पूरी नहीं होने पर प्रदर्शनकारियों ने विधानसभा घेराव की चेतावनी जारी की है। अभ्यर्थियों का कहना है कि बेसिक शिक्षा विभाग की अनदेखी की वजह से भर्तियां नहीं हो पा रही हैं। हम बीते कई महीनों से मंत्री से मुख्यमंत्री तक को मांग पत्र दे चुके हैं। लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। थक हारकर हमें मजबूरन सड़क पर उतरना पड़ रहा है। हम तब तक प्रदर्शन करेंगे। जब तक हमारी मांगों को मान नहीं लिया जाएगा।

इससे पहले सभी अभ्यर्थी 12 जुलाई को अचानक मुख्यमंत्री योगी आदित्यना के आवास पर पहुंच गए थें। सैकड़ों की संख्या में पहुंचे अभ्यर्थियों को देखकर पुलिस के हाथ पांव फूल गए थे। आनन-फानन में पुलिस ने सभी को हटाया था। दर्शनकारियों में वह लोग ज्यादा थे, जो भर्ती प्रक्रिया में शामिल भी नहीं हुए। बावजूद इसके वे प्रक्रिया में धांधली का आरोप और नए पदों पर भर्ती की मांग कर रहे थे। आरोप है कि प्रदेश में शिक्षकों के रिक्त पदों की संख्या बहुत ज्यादा है।

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