शिवपाल यादव ने कहा- एक हजार में कैसे गुजारा करेगा गरीब, तीन माह तक कम से कम तीन हजार दे सरकार

सरकार के दिहाड़ी मजदूरों को एक हजार की मदद पर भड़के प्रसपा मुखिया

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न्‍यूज टुडे नेटवर्क। यूपी सरकार के दिहाड़ी मजदूरों इस महीने एक हजार रूपए की मदद देने के फैसले के बाद इस पर सियासत शुरू हो गयी है। प्रदेश के विपक्षी दलों ने इस फैसले पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के मुखिया शिवपाल सिंह यादव ने रविवार को प्रदेश सरकार को निशाने पर लेते हुए बयान दिया कि रोज मर्रा के कमाने वालों के लिए एक हजार रूपए की रकम नाकाफी है। शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि एक हजार रूपए में कोई परिवार एक महीने तक गुजारा कैसे कर सकता है। यादव ने इस रकम को बढ़ाकर तीन हजार रूपए करने की मांग की है। वहीं शिवपाल ने कहा कि सरकार कम से कम तीन माह तक यह मदद जारी रखे। उन्होंने इस वैश्विक आपदा से प्रभावितों के लिए एक समावेशी और लोककल्याणकारी आर्थिक पैकेज की भी मांग की है।

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शिवपाल यादव ने कहा है कि रोजाना कमाई कर परिवार का भरण पोषण करने वाले रेहड़ी-पटरी, ठेला, खोमचा, खोखा लगाने वाले पटरी दुकानदारों, दिहाड़ी मजदूरों, रिक्शा/ई-रिक्शा चालक, पल्लेदार सहित नाविकों, नाई, धोबी, मोची, हलवाई आदि जैसे परम्परागत कामगारों के सामने भी रोजी-रोटी का भयानक संकट आ खड़ा हुआ है। ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एक माह के लिए प्रदान किया जाने वाला 1,000 रुपए का भरण-पोषण भत्ता अत्याधिक कम है।
उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि इसे न्यूनतम तीन माह के लिए प्रति माह 3,000 किया जाए। शिवपाल ने आगे यह भी कहा है कि निर्मम कोरोना काल में घर वापस लौटने वाले लाखों प्रवासी मजदूर, सब्जी, फल व दुग्ध उत्पादक, मुर्गीपालक, मत्स्य पालक व लघु पशुपालक और अन्नदाता भी भयानक आर्थिक चुनौतियों से लड़ रहे हैं।

आपदा से छोटे और मध्यम व्यवसायी बुरी तरह से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि मेरा यह भी आग्रह है कि राज्य व केंद्र सरकार इनकी परेशानियों को ध्यान में रखकर एक समावेशी और लोककल्याणकारी आर्थिक पैकेज की भी घोषणा करे। बता दें कि यूपी सरकार ने शनिवार को कैबिनेट बैठक के दौरान एक बड़ा फैसला लेते हुए फुटकर दुकानदार, रेहड़ी- पटरी वालों को एक हजार रुपये महीना भत्ता और 3 महीने का राशन देने का फैसला लिया था।

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