खुद ही वेंटिलेटर पर आ गया बरेली का 300 बेड कोविड अस्‍पताल, कुर्सी और बेंचों पर लग रही मरीजों के आक्‍सीजन

बेड नहीं मिलने से बढ़ रहीं मरीजों की दिक्‍कतें

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न्‍यूज टुडे नेटवर्क। कोरोना काल में प्रदेश के मुखिया योगी आदित्‍यनाथ के प्रदेश में आक्‍सीजन और बेडों की कोई कमी नहीं वाले बयान के दूसरे ही दिन बरेली जिले से जो तस्‍वीर सामने आयी है वो यह बताने के लिए काफी है कि राजनेताओं के बयानों और अस्‍पतालों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की जमीनी हकीकत क्‍या है। कोरोना संक्रमण के दौरान बरेली के अस्‍पतालों में बेड और वेंटिलेटर पहले से ही कम हो गए थे अब आक्‍सीजन के लिए भी मरीजों के परिजन शहर भर के चक्‍कर लगा रहे हैं।

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बरेली के तीन सौ बेड अस्‍पताल में ही बुधवार को कई मरीजों को कुर्सी और बैठने वाली बेंच पर लिटाकर ही आक्‍सीजन लगायी गयी थी और कुछ मरीजों को तो जगह के अभाव में जमीन पर ही लिटा दिया गया था क्‍योंकि अस्‍पताल में सभी बेड पहले से ही फुल थे। बरेली के तीन सौ बेड कोविड अस्‍पताल के इस नजारे ने बुधवार को सभी को झकझोर कर रख दिया था। 

जमीन पर पड़ा मरीज, कुर्सी पर बैठा मरीज, और बैंच पर लेट कर बेड का इंतजार करता मरीज कुछ ऐसा ही नजारा बरेली के 300 बेड कोविड अस्‍पताल का बुधवार को नजर आया। कोरोना काल में सरकार के अस्‍पताल अब खुद ही वेंटिलेटर पर चले गए हैं। दरअसल पिछले कई दिनों से बरेली में सोशल मीडिया पर अस्‍पतालों में बेड की कमियों और वेंटिलेटर व आक्‍सीजन की कमी को लेकर खबरें देखने को मिल रही थीं। बुधवार को ये नजारा साफ भी हो गया कि हालात यहां भी इस कदर खराब हैं।

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बरेली के अस्‍पताल का हाल

एक मरीज के तीमारदार ने बताया कि उसके मरीज को सुबह से दोपहर हो गई है लेकिन बेड नहीं मिल पाया है। आखिर में जब उसकी हालत बिगड़ी तो जमीन पर चादर बिछा कर उसको ऑक्सीजन लगा दी गयी लेकिन तब तक बहुत देर हो गई थी। परिजनों के मुताबिक अस्पताल प्रशासन अगर उनको सही समय पर इलाज मुहैया करवा देता तो उसकी जान बच सकती थी।