लखनऊ: अस्‍पताल के ओटी फ्रिज में निकली बियर, तमाम निजी अस्‍पतालों की लापरवाही सामने आयी

डीएम अभिषेक प्रकाश ने छह टीमों को छापामार कार्रवाई के आदेश दिए तो हुआ खुलासा

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न्‍यूज टुडे नेटवर्क। राजधानी लखनऊ के कई निजी अस्‍पतालों में बड़ी लापरवाहियां सामने आयी हैं। एक अस्‍पताल के ओटी वार्ड के फ्रीजर में तो बियर रखी मिलीं। दरअसल डीएम अभिषेक प्रकाश ने दर्जनों अस्‍पतालों पर छापेमारी करके व्‍यवस्‍थाओं का निरीक्षण किया तो कई अस्‍पतालों में लापरवाही की पोल खुलती गयी। कई अस्‍पतालों में बड़ी लापरवाही सामने आयी है। डीएम ने लापरवाही बरतने वाले सभी अस्‍पतालों पर कार्रवाई के निर्देष दिए हैं। डीएम ने टीम के साथ दो दर्जन से अधिक अस्‍पतालों को चेक किया था।

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छह टीमों ने की छापेमारी

लखनऊ जिलाधिकारी ने मजिस्‍ट्रेट और उप जिलाधिकारी व चिकित्सीय अधिकारी के नेतृत्व में 6 टीम का गठन करके शहर के विभिन्न अस्पतालों में छापेमारी की कार्यवाही को अंजाम दिया।इस दौरान कई अस्पतालों में गम्भीर खामियां मिलीं।एक अस्पताल की ओटी में रखें फ्रिज में बीयर की बोतल लगी मिलीं, जिस पर जिलाधिकारी ने कड़ी कार्रवाई की संस्तुति करते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी को तत्काल एक्शन लेने के निर्देश दिए हैं।

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लाइसेंस बिना ही खोल लिए अस्‍पताल

डिप्टी कलेक्टर प्रज्ञा पाण्डेय व डॉ. दिलीप भार्गव ने कुल 4 अस्पतालों का निरीक्षण किया।उस दौरान लक्ष्य कैंसर हाॅस्पिटल पहुंची टीम ने पाया कि अस्पताल का लाइसेन्स 30 अप्रैल 2021 के बाद नवीनीकरण ही नहीं हुआ है। इस अस्पताल में 20 बेड की स्वीकृति थी, जब कि इसके सापेक्ष जांच में 31 बेड पाए गए।अस्पताल की ओटी और वार्ड में साफ-सफाई संतोषजनक नहीं पाई गई। जांच दल ने अस्पताल के रिकार्ड भी खंगाले, जिसमें पाया गया कि मरीज जमीऊरहमान की 7 जुलाई को कीमोथेरेपी के लिए फाइल बनी थी, लेकिन न तो इलाज हुआ और न ही डिस्चार्ज का समय दर्ज था।इसी तरह रमेश चन्द्रा नाम के मरीज की 1 जून को भर्ती किए जाने की फाइल थी, लेकिन इनके डिस्चार्ज का विवरण ही नहीं था।

नियम विरूद्ध लगा दिए बेड

जांच में पाया गया कि अस्पताल प्रबन्धन द्वारा मरीज देखने के लिए डॉ. समीर बेग को ऑन काॅल बुलाया जाता है जबकि अस्पताल के पंजीकरण दस्तावेजों में डॉ. समीर बेग का कोई जिक्र नहीं है।इसके बाद टीम ने काकोरी हाॅस्पिटल का निरीक्षण किया।यहां न तो डाक्टर मौजूद थे और न ही कोई चिकित्सीय सुविधाएं दिखी। इलाज के नाम पर केवल दो बेड ही पाये गए।अस्पताल में मौजूद स्टाॅफ रजिस्ट्रेशन से सम्बन्धित कोई दस्तावेज नहीं दिखा पाया।इसके बाद टीम हिन्द हॉस्पिटल पहुंची, जहां सूचना देने के बाद भी कोई डाक्टर नहीं उपस्थित हुआ।अस्पताल में कुल 12 बेड थे, जिनमें से 4 बेड काॅरिडोर में पड़े पाये गये।अस्पताल के डिस्प्ले बोर्ड पर आर्थोपैडिक सर्जरी आदि सुविधाओं का जिक्र था, लेकिन इससे सम्बन्धित डाॅक्टर और सुविधाएं मौजूद नहीं पाएं गए।टीम के पूछने पर स्टाॅफ ने मो. आरिफ (आयुष डाक्टर) से सम्पर्क किया, लेकिन इनके द्वारा कोई पंजीकरण दस्तावेज नहीं दिखाया जा सका।

इसके बाद जांच दल ने नए खुले साधना हाॅस्पिटल का निरीक्षण किया।पता चला कि हाॅस्पिटल के पंजीकरण के लिए आवेदन किया गया है, जिसकी स्वीकृति अभी प्राप्त नहीं हुई है।बावजूद इसके अस्पताल प्रबन्धन द्वारा गंभीर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है।यहां भी डाक्टरों से सम्पर्क नहीं हो पाया।

निर्माण पूरा है नहीं चल रहे ट्रामा सेन्‍टर्स

डिप्टी कलेक्टर गोविन्द मौर्य व डॉ. आरबी सिंह के नेतृत्व में टीम ने चन्द्रा हाॅस्पिटल का निरीक्षण किया।यहां स्टाॅफ द्वारा एम्बुलेन्स फिटनेस सर्टीफिकेट एवं बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेन्ट सर्टीफिकेट नहीं प्रस्तुत किया जा सका। उक्त अस्पताल का ब्लड बैंक से भी कोई कॉर्डिनेशन नहीं दिखा।साथ ही अस्पताल परिसर में स्थित मेडिकल स्टोर का लाइसेन्स नवीनीकरण नहीं हुआ।अस्पताल में कोविड हेल्प डेस्क, डॉक्टर चेन्ज रूम और पोस्ट ऑपरेशन रूम भी नहीं थे।इस रूट पर स्थित हिम सिटी हाॅस्पिटल में भी आपातकालीन चिकित्सीय सुविधाएं नहीं मिली।यहां ड्यूटी पर मौजूद डाक्टर (बीयूएमएस) थे, जबकि सर्जन, आर्थोपैडिक सर्जन, एनिसथिसिया के डॉक्टर मौजूद नहीं थे।अस्पताल के पास फायर एनओसी और बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेन्ट का सर्टीफिकेट नहीं था।इसके अलावा कोविड हेल्प डेस्क, इमरजेन्सी यूनिट, प्री एवं पोस्ट ऑपरेशन रूम भी नहीं था।