यूपी माडल की पोल खोलने का पूर्व आईएएस को मिला इनाम, एक और एफआईआर, गंगा में लाशों की फोटो वायरल की थी

पुलिस ने कहा- सात साल पुराने हैं फोटो, दो दिन पूर्व ही प्रशासन ने नदी किनारे रेत से दबवाए थे कई शव

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न्‍यूज टुडे नेटवर्क। गंगा में तैरती लाशों की फोटो सोशल मीडिया पर पोस्‍ट करने वाले पूर्व आईएएस के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज कर ली गयी है। पुलिस पूर्व आईएएस की तलाश में जुटी है। दो दिन पूर्व ही उन्‍नाव में गंगा नदी में शवों में फोटो पोस्‍ट करके पूर्व आईएएस ने पोस्‍ट की थी पोस्‍ट में लिखा था कि यह हिन्‍दुओं के लिए कलंक है। पूर्व आईएएस एसपी सिंह ने अपनी पोस्ट् में लिखा था कि 67 शवों को योगी सरकार ने गंगा के तट पर जेसीबी से गड्ढा खोदकर दफन किया है। शवों का अंतिम संस्कार हिन्दू रीति रिवाज से न करना हिंदुओ के लिए कलंक जैसा है। यूपी का यह योगी मॉडल है, जिसमें जीवित को इलाज नहीं और मृतक का अंतिम संस्कार नहीं हो रहा है। उन्नाव सदर कोतवाली पुलिस ने इस पोस्ट का संज्ञान लिया है।

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पुलिस का दावा सात साल पुराने फोटो

पुलिस का दावा है फोटो में जो शव गंगा में बहते हुए दिखाए जा रहे हैं, वह जनवरी 2014 का दृश्य है। सदर कोतवाली में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी पर महामारी एक्ट, आपदा प्रबंधन एक्ट व आईटी एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया है। हालांकि यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले वाराणसी मेें बीते शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे से पहले भी उन्होंने एक वीडियो पोस्ट कर अस्पताल और इलाज की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए थे। पुलिस ने उस वीडियो को सितंबर 2020 का बताकर उन पर एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस का तर्क था कि सिंह ने पुराना वीडियो गलत तथ्यों के साथ पेश कर अफवाह फैलाने और प्रशासन की छवि धुमिल करने का काम किया है। उधर सरकार के व्यवस्थाओं की आलोचना करने पर दूसरी एफआईआर से भी पूर्व आईएएस विचलित नहीं है। उनका तर्क है कि ये यूपी मॉडल की पोल खोलने का का इनाम है। सरकार को व्यवस्थाएं दुरूस्त करने पर ध्यान देना चाहिए।

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