शर्मनाक: गाजियाबाद में फुटपाथ पर करना पड़ा 35 शवों का अंतिम संस्‍कार, श्‍मशान घाट पर हाउस फुल का बोर्ड

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न्‍यूज टुडे नेटवर्क। कोरोना संक्रमण के हालात बद से बदतर हो रहे हैं। अब श्‍मशान भी फुल हो रहे हैं। यूपी के गाजियाबाद में गुरूवार को फुटपाथ पर ही 35 शवों का अंतिम संस्‍कार कर दिया गया। श्‍मशान घाट पर बोर्ड लगा दिया गया था कि घाट फुल हो चुका है अब शवों को कहीं और ले जाईए। यूपी में सब कुछ ठीक होने के दावों के विपरीत प्रदेश में दो सौ मौत औसतन होने का दावा हो रहा है। लखनऊ में जलती चिताएं और मृतकों के परिजनों का मातम कोई देख न पाए इसके लिए लोहे की चादरों की दीवार खड़ी कर दी गई है। गाजियाबाद का भी कुछ ऐसा ही है। यहां अर्थी लेकर जब चार लोग पहुंचे तो उन्हें पता चला कि जगह ही नहीं है। आखिरकार लोगों को हिंडन नदी के किनारे फुटपाथ पर शवों का अंतिम संस्कार करना पड़ा।

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वीडियो वायरल

करीब तीन दिन पहले का एक वीडियो सामने आया है। जिसमें गाजियाबाद स्थित हिंडन नदी पर बने श्मशान घाट किनारे कतार में शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि करीब 35 शवों का अंतिम संस्कार एक साथ किया गया है। सभी की कोरोना से मौत हुई थी। रोड किनारे कई एंबुलेंस भी खड़ी थीं।

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श्मशान घाट पर ये बोर्ड - कहीं और ले जाइए शव

यहां लंबी लाइन में लगने के बाद भी लोग अपनों का अंतिम संस्कार नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि श्मशान घाट फुल हैं। अंतिम संस्कार कराने वाले आचार्य मनीष पंडित ने यहां एक बोर्ड लगा दिया है। बोर्ड पर साफ शब्दों में लिखा है कि घाट में अंतिम संस्कार करने के लिए जगह नहीं बची है। अन्य जगह बने श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया जाए या बृजघट ले जाया जाए। इस बोर्ड के लगने के बाद से लोगों को बड़ी परेशानी हो रही है, क्योंकि जिन लोगों की मौत हुई है, उन्हें पहले अस्पताल में बेड और ऑक्सीजन नहीं मिल पाई थी और अब मरने के बाद उन्हें श्मशान में भी जगह नहीं मिल रही।

मजबूरी में लगाया बोर्ड

हिंडन नदी श्मशान घाट पर सामान्य मौत होने वाले लोगों के लिए अलग से अंतिम संस्कार किया जा रहा है। जबकि कोविड-19 संक्रमण से मौत होने वाले लोगों के लिए अलग अंतिम संस्कार करने की जगह बनाई गई है। लेकिन दोनों ही जगह पूरी तरह से फुल हैं। आचार्य मनीष पंडित का कहना है कि उनके यहां अंतिम संस्कार कराने वालों की ज्यादा भीड़ हो गई है। इसलिए उन्हें मजबूरी में अब यह बोर्ड लगाना पड़ा है।