चित्रकूट जेल गैंगवार: सब कुछ फिक्‍स था, दो माह से बंद थे बैरक के बाहर लगे कैमरे, सीएम योगी को सौंपी जांच रिपोर्ट

दो एफआईआर दर्ज करायी गयी, पिस्‍टल कैसे पहुंचा इसकी जांच जारी

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न्‍यूज टुडे नेटवर्क। चित्रकूट की जिला जेल में हुयी गैंगवार मामले में पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज करायी गयी हैं। पहली एफआईआर जेल प्रशासन की ओर से जेल अधीक्षक ने दर्ज करायी गयी है वहीं दूसरी एफआईआर कोतवाली पुलिस की ओर से दर्ज करायी गयी है। गैंगवार में आरोपियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज करायी गयी है। जेल में पिस्‍टल कैसे पहुंचा अभी इस मामले में जांच की जा रही है। उधर सीएम योगी को भेजी गयी रिपोर्ट में जांचकर्ताओं ने बताया है कि जेल की बैरक के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे पिछले दो माह से बंद थे। जेल प्रशासन ने दस बार कैमरे ठीक कराने की शिकायत की थी लेकिन कैमरे सही नहीं कराए गए।

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जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि चित्रकूट जेल में गैंगवार के दौरान तीन बंदियों की मौत अचानक हुई वारदात नहीं है। इसकी पटकथा काफी पहले लिखी जा चुकी थी। इसकी पुष्टि खुद मामले की जांच करने वाले अफसरों की रिपोर्ट बता रही है। जिस हाई सिक्योरिटी सेल में अंशु दीक्षित और मेराज को रखा गया था, वहां के CCTV करीब दो महीने पहले ही बंद किए जा चुके थे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बनी जांच कमेटी के तीन अफसरों कमिश्नर चित्रकूट डीके सिंह, IG चित्रकूट के. सत्यनारायण और DIG कारागार मुख्यालय संजीव त्रिपाठी वारदात के करीब 10 घंटे बाद चित्रकूट जेल पहुंचे। अधिकारियों ने सबसे पहले उन पुलिस कर्मियों से पूछताछ की, जो गैंगवार के समय ड्यूटी पर तैनात थे। हालांकि, सुरक्षाकर्मियों ने पहले से रटे जवाब को दोहराकर किनारा कर लिया। इसके बाद टीम ने इस हाई सिक्योरिटी जेल के सुरक्षा तंत्र पर नजर दौड़ाई तो पूरी पिक्चर साफ नजर आने लगी। जेल की हाई सिक्योरिटी सेल के सभी कैमरे खराब मिले।

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