शिक्षा विभाग के लाखों खर्च, लेकिन अब भी आंखों के तारे जमीं पर, कैसे संवरेगा नौनिहालों का भविष्य, देखिए यह खबर…

बरेली,न्यूज टुडे नेटवर्क। नए राजकीय हाईस्कूल शुरू करने के लिए भवन बनवाने के लिए लाखों रुपये खर्च किए गए। दावा था कि जल्द ही लैब, फर्नीचर सहित अन्य सुविधाएं भी दी जाएंगी, लेकिन पाच साल गुजर गए। अब तक नौंवी और 10 वीं में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को बैठने के लिए फर्नीचर तक नहीं मिला।
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शिक्षा विभाग के लाखों खर्च, लेकिन अब भी आंखों के तारे जमीं पर, कैसे संवरेगा नौनिहालों का भविष्य, देखिए यह खबर…

बरेली,न्‍यूज टुडे नेटवर्क। नए राजकीय हाईस्कूल शुरू करने के लिए भवन बनवाने के लिए लाखों रुपये खर्च किए गए। दावा था कि जल्द ही लैब, फर्नीचर सहित अन्य सुविधाएं भी दी जाएंगी, लेकिन पाच साल गुजर गए। अब तक नौंवी और 10 वीं में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को बैठने के लिए फर्नीचर तक नहीं मिला। जैसे-तैसे कई साल से बच्चे दरी और चटाई पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

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यह हाल जिले के उन 12 राजकीय हाईस्कूलों का है, जहा कक्षाएं कई साल से चल रही हैं। माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत वर्ष 2013-14 में बरेली में 22 राजकीय हाईस्कूल स्वीकृत हुए थे। लेकिन इसके बजट की मंजूरी 2015-16 में मिली। प्रत्येक विद्यालय भवन की लागत 69.51 लाख रुपये आई। पैकफेड, यूपीपीसीएल और यूपी डेस्को को अलग-अलग स्कूल निर्माण के लिए दिए गए थे। 12 स्कूल तैयार होकर हैंडओवर भी हो गए।

पांच लाख चौदह हजार रुपये है फर्नीचर की लागत

प्रत्येक राजकीय स्कूल में फर्नीचर के लिए पांच लाख चौदह हजार रुपये और लैब उपकरण के लिए एक लाख रुपये की स्वीकृति है। लेकिन न तो केंद्र से पैसा आया न ही राज्य सरकार से नतीजा, सुविधाओं के अभाव में कक्षाएं संचालित हो रही हैं।

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ये हैं स्‍कूल

राजकीय हाईस्कूल सियाठेरी बहेड़ी, राजकीय हाईस्कूल टाडा छगा, राजकीय हाईस्कूल विलारी रतनगढ़, राजकीय हाईस्कूल मोहम्मदपुर नवाबगंज, राजकीय हाईस्कूल सिमरा केशोपुर फरीदपुर, राजकीय हाईस्कूल इनायतपुर फरीदपुर, राजकीय हाईस्कूल बराथानपुर आवला, राजकीय हाईस्कूल करतौली फरीदपुर, राजकीय हाईस्कूल वलई भगवंतपुर आवला, राजकीय हाईस्कूल नंदगाव सदर, राजकीय हाईस्कूल गुलरिया अताहुसैन बहेड़ी, राजकीय हाईस्कूल बसंतपुर आंंवला।
माध्यमिक राज्य परियोजना निदेशालय की ओर से बजट में इसकी व्यवस्था की जा रही है। उम्मीद है जल्द इसके लिए धनराशि जारी हो जाएगी।

डॉ.अमरकांत सिह,डीआइओएस,बरेली