पराली को खेत की मिट्टी में मिलाने के लिए किसानों को किराए पर मिलेंगे यह कृषि यंत्र, खेतों में पराली जलाने से रोकने के लिए क्या हुए इंतजाम देखें यह खबर….

बरेली,न्यूज टुडे नेटवर्क। खेतों में पराली जलाने से रोकने के लिए किसानों को अब प्रोत्साहित किया जाएगा कि वे पराली को खेतों की मिट्टी में ही मिला दें। इससे खेतों को जैविक खाद का लाभ तो मिलेगा ही पर्यावरणमें प्रदूषण का स्तर भी कम हो सकेगा। पराली को खेत की मिटटी में मिलाने के लिए
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पराली को खेत की मिट्टी में मिलाने के लिए किसानों को किराए पर मिलेंगे यह कृषि यंत्र, खेतों में पराली जलाने से रोकने के लिए क्या हुए इंतजाम देखें यह खबर….

बरेली,न्‍यूज टुडे नेटवर्क। खेतों में पराली जलाने से रोकने के लिए किसानों को अब प्रोत्‍साहित किया जाएगा कि वे पराली को खेतों की मिट्टी में ही मिला दें। इससे खेतों को जैविक खाद का लाभ तो मिलेगा ही पर्यावरणमें प्रदूषण का स्‍तर भी कम हो सकेगा। पराली को खेत की मिटटी में मिलाने के लिए विशेष प्रकार के कृषि यंत्र बनाए गए हैं जिन्‍हें किसान बिना खरीद किराए पर लेकर यह काम कम खर्च में आसानी से कर सकते हैं।

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तकनीकी खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए अनुदान पर बीज उपलब्ध कराने के साथ ही प्रशिक्षण, प्रदर्शन के जरिए तकनीकी जानकारी दी जा रही है। वहीं, अब किसानों की सुविधा को जिले में पांच फार्म मशीनरी बैंक स्थापित कर दिए गए हैं। योजना के तहत यंत्रों पर 80 फीसदी अनुदान दिया जाएगा। इतना ही नहीं किसान समितियों से किराये पर भी कृषि यंत्र लेकर कृषि कार्य सुगमता से कर सकते हैं। करीब 35 किसान इसका लाभ ले चुके हैं।

एनजीटी की सख्ती पर फसल अवेशष जलाने को लेकर चौतरफा हाहाकार मचा है। एआरओ विकास कुमार ने बताया कि किसान खेत में फसल न अवशेष को जलाएं, बल्कि उसे मिट्टी में मिलाएं। इसको लेकर कृषि विभाग लगातार किसानों को जागरूक कर रहा है। पराली जलाने से रोकने को लेकर एनजीटी भी सख्त है। पराली जलाने पर किसान पर एफआईआर कराने का प्रावधान भी है।

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लिहाजा इसकी रोकथाम के लिए सरकार के निर्देश पर फसल अवशेष को अत्याधुनिक तरीके से मिट्टी में मिलाकर उसे खाद बनाने के लिए पांच फार्म मशीनरी बैंक की स्थापना बहेड़ी के पचपेड़ा, भोजीपुरा के भिटौरा मोहन, आंवला के खुर्द बियोधन रामनगर, नवाबगंज के सतुईया खुर्द और भोजीपुरा के सुरला स्थिति सहकारी समिति पर की गई है। यहां मिलने वाले पांच तरह के कृषि यंत्रों को क्रय करने की आवश्यकता नहीं होगी बल्कि किराए पर मिल जाएगा। पांच तरह के कृषि यंत्रों में हैपी सीडर, सुपर सीडर, पैडी स्ट्रा चापर,श्रेडर,मल्चर आदि शामिल है।

छोटे किसान जिनके पास ट्रैक्टर नहीं है,वह फार्म मशीनरी बैंक से इसे भी किराए पर ले सकेंगे। मशीनरी बैंक का लाभ लेने को विभाग प्रचार प्रसार के माध्यम से किसानों को जागरूक कर रहा है। एआरओ ने उदाहरण के तौर पर बताया कोई यंत्र पांच लाख का है तो उस पर 80 प्रतिशत यानी चार लाख की सब्सिडी सरकार द्वारा दी जाएगी।