उत्तराखंड - तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी मानती थी पर्यावरणविद सुंदर लाल बहुगुणा की बात, यह है रोचक किस्सा

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देश के जाने माने पर्यावरणविद हिमालय के संरक्षक पद्मविभूषण सुंदरलाल बहुगुणा की कोरोनावायरस से निधन हो गया है। ऋषिकेश एम्स में उन्होंने अंतिम सांस ली है। देश भर को बड़ी क्षति हुई है। देश के प्रधानमंत्री सहित सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। आज हम उसी महान व्यक्ति का तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़ा हुआ किस्सा सुनाएगे जिसमे देश मे 15 साल तक पेड़ो के कटान पर रोक लग गई थी।

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सुंदरलाल बहुगुणा का जन्म उत्तराखंड के टिहरी ज़िले में हुआ था । 13 साल की उम्र में उन्होंने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी । वह बापू  यानी महात्मा गांधी के  कट्टर समर्थक और अनुयाई थे । सन 1956 में उनकी शादी होने के बाद उन्होंने राजनीतिक जीवन से संन्यास ले लिया था.1960 के दशक में उन्होंने अपना ध्यान वन और पेड़ की सुरक्षा पर केंद्रित किया. चिपको आंदोलन में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. जंगलों और पेड़ों की सुरक्षा के लिए 1970 में उन्होंने आंदोलन शुरू किया जो कि देखते ही देखते पूरे भारत में फैलने लगा।  चिपको आंदोलन उसी का एक हिस्सा था.1980 की शुरुआत में बहुगुणा ने हिमालय की 5,000 किलोमीटर की यात्रा के दौरान उन्होंने बहुत से गांव का दौरा किया और लोगों के बीच पर्यावरण सुरक्षा का संदेश फैलाया. उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से भेंट की और उनसे 15 सालों तक के लिए पेड़ों के काटने पर रोक लगाने की अपील की थी. उनकी इस कोशिश पर पेड़ों के काटने पर 15 साल के लिए रोक लगा दी गई थी ।