उत्तराखंड - बड़ी खबर - सांसद प्रदीप टम्टा ने पीएम मोदी को लिखा पत्र , की ये बड़ी मांग

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उत्तराखंड - कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर ऋषिकेश स्थित केन्द्र सरकार के उपक्रम आई.डी.पी.एल. संस्थान को पुर्नजीवित किये जाने की मांग की है।
प्रदीप टम्टा ने कहा कि आज पूरा विश्व कोरोना महामारी से लडाई लड़ रहा है। वर्तमान में पूरा भारत कोरोना महामारी की चपेट में है तथा गम्भीर चुनौती का सामना कर रहा है। कांग्रेस पार्टी केन्द्र सरकार द्वारा कोरोना महामारी से बचाव के लिए किये जा रहे सभी प्रयासों के लिए सरकार व देश की जनता के साथ खड़ी है। कोरोना महामारी से लड़ाई लड़ने के लिए जहां लाॅक डाउन व सामाजिक दूरी बनाये रखनी जरूरी है, वहीं इसे रोकने के लिए समय पर वैक्सिनेशन भी अत्यंत आवश्यक है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि अधिक से अधिक और जल्द वैक्सीनेशन कोरोना को हराने के लिए जरूरी है। जिन देशों ने अपने यहाँ ज्यादा वैक्सीन लगवाई, उनमें कोरोना की दूसरी लहर का कम प्रभाव पड़ा। हमारे देश में दूसरी लहर, पहली लहर से 320 प्रतिशत ज्यादा भयानक साबित हुई है। यह पूरे विश्व का रिकॉर्ड है।

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उन्होंने कहा भारत की कुल आबादी के मात्र 12 प्रतिशत को अभी तक पहली डोज मिली है और मात्र 3.4 प्रतिशत आबादी पूरी तरह से वैक्सिनेटेड हो पाई है। 15 अगस्त 2020 के भाषण में आपने देश के हर एक नागरिक को वैक्सिनेट करने की जिम्मेदारी लेते हुए कहा था कि “वैक्सिनेशन के लिए पूरा खाका तैयार है।“ लेकिन अप्रैल 2021 में दूसरी लहर की तबाही के दौरान केन्द्र सरकार ने सबको वैक्सीन देने की जिम्मेदारी से अपने हाथ खींचते हुए इसका आधा भार राज्य सरकारों पर डाल दिया है जो कि औचित्यहीन है। केन्द्र सरकार ने 1 मई तक मात्र 34 करोड़ वैक्सीन का ऑर्डर दिया था तो बाकी वैक्सीन कहां से आएँगी यह यक्ष प्रश्न है। देश में वैक्सीन अभाव के चलते कई राज्य सरकारें ग्लोबल टेंडर निकालने को मजबूर हुईं। मगर उन्हें खास सफलता नहीं मिली। च्प्रिमतए डवकमतदं जैसी कम्पनियों ने प्रदेश सरकारों से डील करने से इंकार कर दिया है। आज वैक्सीन लगाने वाले काफी केन्द्रों पर ताले लटके हैं एवं 18-45 आयुवर्ग की आबादी को वैक्सीन लगाने का काम बहुत धीमी गति से चल रहा है।

प्रदीप टम्टा ने कहा कि केन्द्र सरकार की विफल वैक्सीन नीति के चलते राज्यों में अलग-अलग दाम पर वैक्सीन मिल रही है। जो वैक्सीन केंद्र सरकार को 150रू में मिल रही है, वही राज्य सरकारों को 400रू में और निजी अस्पतालों द्वारा 900रू में लगाई जा रही है। यदि भारत सरकार दिसम्बर 2021 तक हर हिंदुस्तानी को वैक्सिनेट करना चाहती है तो हमें प्रतिदिन 70-80 लाख लोगों को वैक्सीन लगानी पड़ेगी, परन्तु वैक्सीन की कमी के कारण मई 2021 तक औसतन प्रतिदिन 19 लाख डोज ही लग पाई हैं।
प्रदीप टम्टा ने कहा कि भारत देश के पास स्मालपॉक्स, पोलियो की वैक्सीन घर-घर पहुंचाने का अनुभव है, लेकिन सरकार की दिशाहीनता ने वैक्सीन के उत्पादन और वितरण दोनों को चैपट कर दिया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड प्रदेश के ऋषिकेश स्थित केन्द्र सरकार के उपक्रम आई.डी.पी.एल. की ओर आकर्षित कराना चाहते हैं। भारत में वैक्सीन उत्पादन में नम्बर एक रहे आई.डी.पी.एल. जैसे संस्थानों को ऐसे समय में पुर्नजीवित करने की अत्यंत आवश्यकता है। यदि आई.डी.पी.एल. को पुर्नजीवित कर कोरोना महामारी के वैक्सिनेशन का उत्पादन किया जाता है तो देश वैक्सिनेशन में आत्मनिर्भर तो होगा ही हजारों लोगों को रोजगार भी उपलब्ध हो सकेगा।
प्रदीप टम्टा ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि देश में वैक्सिनेशन की आवश्यकता को मद्देनजर रखते हुए भारत सरकार के उपक्रम आई.डी.पी.एल. को पुर्नजीवित किया जाना चाहिए।

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