फर्जी कोराना जांच प्रकरण: जवाबदेही से कैसे बच सकते हैं अफसर

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फणींद्र नाथ गुप्ता
रुद्रपुर। यूपी की सीमा पर फर्जी तरीके से चल रही कोरोना जांच का भंडाफोड़ होने पर भले ही आठ लोगो की गिरफ्तारी कर ली गई हो, मगर जिले के जिम्मेदार अफसर भी जवाबदेही से बच नहीं सकते।   सवाल यह है कि उत्तराखंड आने वाले यात्रियों की कोरोना जांच का ठेका एक कंपनी को दिया गया था, मगर उसकी कार्य प्रणाली पर नजर क्यों नहीं रखी गई? आखिर कब से फर्जी तरीके से कोरोना की जांच की जा रही थी। उत्तराखंड और खासकर कुमाऊं में जो कोरोना संक्रमण फैला उसकी एक वजह यह फर्जी जांच भी हो सकती है।

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गौरतलब है कि उत्तराखंड उत्तर प्रदेश की सीमा पर पुलभट्टा के समीप यूपी व अन्य राज्यों से आने वाले यात्रियों की कोरोना जांच का प्रावधान किया गया था। यह कार्य एक निजी कंपनी को सौंपा गया था, लेकिन उसका पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी किसकी थी। सीमा पर जो हो रहा था, वह बेहद चौंकाने वाला था। यहां हरिद्वार में इस्तेमाल हो चुकी तीलियां यात्रियों की नाक में डाली जा रही थी और उन्हें निगेटिव होने की फर्जी रिपोर्ट दे दी जाती थी।

कल हुई जांच में इस बात की पुष्टि हो गई।   कल 103 लोगों की कोरोना जांच हुई और  स्टिक सिर्फ तीन मिलीं। यहां हरिद्वार में आठ मार्च को इस्तेमाल की गई की स्टिक भारी मात्रा में बरामद हुई थी। उनके पास बिना उपयोग की गई सिर्फ 89 किटें थीं। हालांकि इस मामले में आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया और आरोपियो की गिरफ्तारी कर ली गई। 

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सवाल यह है कि इस फर्जीवाड़े को रोकने की जिम्मेदारी किसकी थी। आखिर उन पर क्या कार्रवाई होगी।