चमोली-त्रिवेन्द्र सरकार की बड़ी कामयाबी, कोरोना महामारी के बावजूद इतने लाख श्रद्धालु ने की चारधाम यात्रा

चमोली-मार्च में कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन के बाद आवाजाही पूरी तरह से बंद हो गई थी। लेकिन इसके बाद जैसे ही लॉकडाउन खुला तो उत्तराखंड के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। अब बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ ही चारधाम यात्र ने भी विराम ले लिया। कोरोना काल में देर
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चमोली-त्रिवेन्द्र सरकार की बड़ी कामयाबी, कोरोना महामारी के बावजूद इतने लाख श्रद्धालु ने की चारधाम यात्रा

चमोली-मार्च में कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन के बाद आवाजाही पूरी तरह से बंद हो गई थी। लेकिन इसके बाद जैसे ही लॉकडाउन खुला तो उत्तराखंड के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। अब बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ ही चारधाम यात्र ने भी विराम ले लिया। कोरोना काल में देर से शुरू हुई यात्रा ने बरसात के बाद तेजी पकड़ ली। जिसका नतीजा यह हुआ कि मध्य अक्टूबर के बाद तो बदरी-केदार धाम में 3000 से 4000 यात्री रोजाना पहुंचने लगे थे। यही वजह रही कि कपाट बंद होने तक चारों धाम में यात्रियों की संख्या तीन लाख 11 हजार 549 पहुंच गई। इसका श्रेय त्रिवेन्द्र सरकार की बेहतर व्यवस्था को जाता है। जिससे श्रद्धालु ने कोरोनाकाल में भी चारों धामों के दर्शन किये।

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आज बदरीनाथ धाम के साथ ही भविष्य बदरी धाम और द्वितीय केदार मध्यमेश्वर धाम के कपाट भी बंद हो गए। इससे पहले अन्नकूट पर्व पर 15 नवंबर को गंगोत्री धाम और भैयादूज पर्व पर यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए गए थे। इसके अलावा गत 17 अक्टूबर को चतुर्थ केदार रुद्रनाथ धाम और गत चार नवंबर को तृतीय केदार तुंगनाथ धाम के कपाट भी शीतकाल के लिए बंद हो चुके थे। पांचवें धाम कहे जाने वाले हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा के साथ ही लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट भी बीते दस अक्टूबर को बंद कर दिए गए थे।

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