उत्तराखंड- अब उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बाघों पर ऐसे रखी जायेगी निगरानी, वन विभाग इन पहाड़ी जंगलों में लगायेगा ट्रैप कैमरे

उत्तराखंड में अब वन विभाग वन्यजीवों के प्रति बेहद सजग नजर आ रहा है। जानकारी के अनुसार वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) देहरादून की ओर से उच्च स्थलीय टाइगर प्रोजेक्ट (एचएटीपी) के तहत अब उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बाघों को खोजने का कार्य शुरू किया जा रहा है। इसके लिये वन विभाग द्वारा जंगलों में कैमरे लगाये
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उत्तराखंड- अब उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बाघों पर ऐसे रखी जायेगी निगरानी, वन विभाग इन पहाड़ी जंगलों में लगायेगा ट्रैप कैमरे

उत्तराखंड में अब वन विभाग वन्यजीवों के प्रति बेहद सजग नजर आ रहा है।  जानकारी के अनुसार वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) देहरादून की ओर से उच्च स्थलीय टाइगर प्रोजेक्ट (एचएटीपी) के तहत अब उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बाघों को खोजने का कार्य शुरू किया जा रहा है। इसके लिये वन विभाग द्वारा जंगलों में कैमरे लगाये जायेंगे।

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और कैमरा से बाघों को ट्रैप कर उन पर निगरानी रखी जायेगी। आपको बता दें कि वन विभाग द्वारा समुद्रतल से 3000 से 5000 मीटर की ऊंचाई पर कैमरा ट्रैप लगाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। अब वन विभाग और डब्ल्यूआईआई देहरादून के विशेषज्ञ शीघ्र स्वचालित कैमरे लगाने का कार्य शुरू कर देंगे।

जानकारी के अनुसार साल 2016-17 में पहली बार डब्ल्यूआईआई की अंकिता भट्टाचार्या ने 3300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित छिपलाकेदार क्षेत्र के कनार गांव में एक बाघिन को ट्रैप किया था। अंकिता भट्टाचार्य कहना है कि पिथौरागढ़ बाघ के लिए मुफीद जगह है। उन्होने बताया कि अगर यहां केजंगलों में सही तरीके से कैमरे लगाए जाएं तो बाघ दिख सकते हैं। उन्होने गोरी घाटी क्षेत्र में बाघ के मिलने की अधिक उम्मीद जताई है।

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यहां लगाए जाएंगे कैमरा ट्रैप

बाघों को कैमरे की नजर में रखने के लिये एचएटीपी के तहत कनालीछीना विकासखंड में अस्कोटए मुनस्यारी के उच्च हिमालयी क्षेत्रए धारचूला के दारमा व दुग्तू के बुग्यालों और ग्लेशियरों में कैमरे लगाए जाएंगे। क्योंकि यह ऐसे क्षेत्र है, जहां बाघों की मौजूदगी बेहद ज्यादा रहती है। इस कार्य प्रणाली के लिये सभी तैयारियां वन विभाग और डब्ल्यूआईआई द्वारा शुरू कर दी है।

आपको बता दें कि विभाग द्वारा इन क्षेत्रों में बाघ की खोज के लिए 100 कैमरे लगाए जाएंगे। इसके लिए वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञ उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जाएंगे। टीम के सदस्य ग्रामीण बुजुर्गों सहित अन्य लोगों से भी बाघ की मौजूदगी पर चर्चा करेंगे। साथ ही हिम तेंदुए और स्नो लैपर्ड को भी इन कैमरों के द्वारा ट्रैप किया जायेगा।

बाघ का पसंदीदा भोजन भरल

जानकारी के अनुसार भरल बाघ का पसंदीदा भोजन है। भरल को हिमालयन भेड़ या ब्लू शीप भी कहा जाता है। ऐसे में बाघ अपनी पसंदीदा भोजन की तलाश में ही उच्च पहाड़ी क्षेत्रों में पहंुचता है।