उत्तराखंड रहबर योजना : अल्पसंख्यक महिलाओं को राज्य सरकार कुछ इस तरह दे रही रोजगार, जानिए क्या खास

उत्तराखंड सरकार, उत्तराखंड रहबर योजना : सभी वर्ग के विकास के लिए गंभीर है। सरकार की ओर से जहां छात्रों के लिए वजीफा योजना शुरू की गई है, वहीं कारोबार के लिए लोगों को ऋण भी दिया जा रहा है। खास बात यह है कि अल्पसंख्यक समाज की महिलाओं का ख्याल भी रखा जा रहा
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उत्तराखंड रहबर योजना : अल्पसंख्यक महिलाओं को राज्य सरकार कुछ इस तरह दे रही रोजगार, जानिए क्या खास

उत्तराखंड सरकार, उत्तराखंड रहबर योजना : सभी वर्ग के विकास के लिए गंभीर है। सरकार की ओर से जहां छात्रों के लिए वजीफा योजना शुरू की गई है, वहीं कारोबार के लिए लोगों को ऋण भी दिया जा रहा है। खास बात यह है कि अल्पसंख्यक समाज की महिलाओं का ख्याल भी रखा जा रहा है। इसको ध्यान में रखते हुए सरकार की ओर से रहबर प्रशिक्षण योजना शुरू की गई है। उत्तराखंड रहबर योजना के तहत अल्पसंख्यक समाज की महिलाओं को तमात तरह का प्रशिक्षण तो दिया जा ही रहा है, उन्हें कारोबार शुरू करने के लिए प्रोत्साहित भी किया जा रहा है।

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अल्पसंख्यक कल्याण विभाग योजना के तहत स्वरोजगार प्रशिक्षण दिया जाता है। राज्य में बेरोजगार सैकड़ों अल्पसंख्यक महिलाओं को रहबर योजना के तहत स्वरोजगार प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। व जरूरतमंद महिलाओं को अपने रोजगार के लिए वित्तीय मदद भी उपलब्ध कराई जाती है। रहबर योजना में गरीबी रेखा से नीचे या गरीबी रेखा से दुगुनी आय सीमा तक की आमदनी में जीवन-यापन करने वाली 18-35 साल की अल्पसंख्यक महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है। रहबर योजना में प्रशिक्षण के लिए अल्पसंख्यक महिलाओं का चयन जनपद स्तर पर गठित चयन समिति के द्वारा की जाती है।

क्या है रहबर योजना का उद्देश्य

उत्तराखंड सरकार की ओर से शुरू की गई रहबर योजना की मदद से उत्तराखंड सरकार अल्पसंख्यक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना चाहती है। महिलाओं को स्वरोजगार का ट्रेनिंग देने और अपना कामकाज शुरू करने के लिए वित्तीय मदद उपलब्ध कराने के माध्यम से समाज के वंचित तबके की महिलाओं का आत्मसम्मान बढ़ाने में मदद मिलेगी।

उत्तराखंड रहबर योजना : अल्पसंख्यक महिलाओं को राज्य सरकार कुछ इस तरह दे रही रोजगार, जानिए क्या खास

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने पिछले साल रहबर एवं अन्य रोजगार योजना पर कुल 1,58,53,000 रुपये खर्च किए थे। चालू वित्त वर्ष में इस तरह की योजनाओं पर राज्य सरकार की करीब छह करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिये स्वरोजगार योजना में इस साल ढाई करोड़ की राशि का प्रावधान किया गया है। उत्तराखंड में पिछले साल जितने लोगों ने स्वरोजगार योजना के तहत ऋण की मांग की थी, उन्हें लोन दे दिया गया।

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रहबर योजना में किस तरह का दिया जाता है प्रशिक्षण

  • रहबर योजना में अल्पसंख्यक महिलाओं को कताई-बुनाई की विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण दिया जाता है।
  • रहबर योजना के तहत अल्पसंख्यक महिलाओं को कंप्यूटर एप्लीकेशन एंड फाइनेंशियल एकाउंटिंग का एक साल का प्रशिक्षण दिया जाता है।
  • इन ट्रेड में अल्पसंख्यक महिलाओं को ट्रेनिंग दी जाती है।

इन ट्रेड में अल्पसंख्यक महिलाओं को दी जाती है टे्रेनिंग

ट्रेड सिलाई-कढ़ाई, अवधि – 6 माह, साक्षर
ट्रेड बुनाई, अवधि – 6 माह, साक्षर
ट्रेडबुटीक, अवधि 6 माह, जूनियर हाई स्कूल(8वीं)
ट्रेडसाफ्ट टायज मैकिंग, अवधि-3 माह, साक्षर

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ट्रेडपेंटिंग, अवधि – 6 माह, हाईस्कूल
ट्रेडधूप-बत्ती अगर बत्ती, अवधि- 6 माह, साक्षर
ट्रेड डिटरजेंट पाउडर, अवधि- 6 माह, साक्षर
ट्रेडकावंड़ का निर्माण, अवधि- 6 माह, साक्षर

योजना के लिए पात्रता

  • रहबर योजना का लाभ उन्हीं को मिलेगा, जो मूल रूप से उत्तराखंड के निवासी होंगे। किसी दूसरे प्रदेश के निवासियों को इस योजना का फायदा नहीं मिलेगा।
  • इस योजना का फायदा सिर्फ उन्हीं महिलाओं को मिलेगा, जो अल्पसंख्यक समाज से जुड़ी होंगी। दूसरे समाज महिलाओं को इसका फायदा नहीं मिलेगा।
  • योजना का फायदा बीपीएल और एपीएल दोनों कार्ड धारकों की सूची में शामिल परिवार को मिलेगा। इसके लिए आय का कोई पैमाना तय नहीं किया गया है।
  • लाभार्थी का चयन जिला स्तर पर किया जाएगा। इसके लिए चयन समिति का गठन किया गया है। महिलाओं को साक्षात्कार की प्रक्रिया से गुजरना होगा।

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योजना के लिए दस्तावेज

  • उत्तराखंड में जो भी लोग इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, उनके पास वोटर आईडी कार्ड होना चाहिए।
  • अगर किसी कारणवश उनके पास वोटर आईडी कार्ड नहीं है तो वे आधार कार्ड की कॉपी भी लगा सकते हैं।
  • पासपोर्ट साइज की फोटो भी फार्म के साथ अटैच करना होगा। अगर बीपीएल और एपीएल कार्ड हो तो उसकी कॉपी भी फार्म के साथ अटैच कर सकते हैं।
  • इसी तरह इस योजना का लाभ लेने के लिए महिलाओं को मूल निवास प्रमाणपत्र भी फार्म के साथ अटैच करना होगा।

कैसे ले सकते हैं रहबर योजना में प्रशिक्षण

  • प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिये महिलाओं के चुनाव से पहले रहबर योजना का प्रचार-प्रसार न्यूजपेपर के जरिये किया जाता है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में योजना का प्रचार पंचायत और शहरी क्षेत्र में नगर पालिका के माध्यम से किया जाता है।
  • प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने के लिए जिस संस्था को चुना गया है वह भी इसका प्रचार करती है।

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कैसे होता है प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए चुनाव

  • आवेदन पत्र प्राप्त होने के बाद पात्रता के आधार पर परीक्षण किया जाता है।
  • इसके बाद चयन समिति महिलाओं का साक्षात्कार लेती है।
  • चयन के बाद 25 प्रतिशत आवेदक को वेटिंग लिस्ट में भी रखा जाता है।

रहबर योजना में ट्रेनिंग पाने के लिए क्या हैं अन्य शर्त

  • अल्पसंख्यक महिलाओं से ट्रेनिंग के लिए कोई फीस नहीं ली जाती है।
  • प्रशिक्षण के दौरान न्यूनतम उपस्थित 85 प्रतिशत होनी चाहिए।
  • प्रशिक्षण की अवधि में हर महीने परीक्षा ली जायेगी।
  • प्रशिक्षण के पूरा होने के बाद प्रमाण पत्र दिया जायेगा।

ऐसे करें ऑफलाइन आवेदन

  • उत्तराखंड सरकार की ओर से शुरू की गई रहबर प्रशिक्षण योजना के लिए ऑफलाइन आवेदन भी किया जा सकता है।
  • अगर आप ऑफलाइन आवेदन करना चाहते हैं तो आपको उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण और वक्फ विकास निगम के कार्यालय पहुंचना होगा।
  • यहां आपको प्रशिक्षण योजना का फार्म मिल जाएगा। फार्म के सभी कॉलम को सही-सही भरें। उसपर जरूरी दस्तावेज अटैच करें।
  • फार्म पर अपनी पासपोर्ट साइज फोटो भी अटैच करें। इसके बाद फार्म को उसी कार्यालय में जमा कर दें। प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।