वैक्सीन : कोरोना से पूर्ण सुरक्षा के लिए जरूरी है वैक्सीन की दूसरी डोज, अध्ययन में दावा

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दुनियाभर में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर को लेकर आशंका बढ़ती जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुतबिक तीसरी लहर से लोगों को सुरक्षित रखने के लिए वैक्सीनेशन अभियान को और तेज करने की आवश्यकता है। लिहाजा संक्रमण की रफ्तार को काबू करने के लिए सरकार वैक्सीनेशन अभियान पर विशेष जोर दे रही है। करोड़ों लोग वैक्सीन ले चुके हैं और करोड़ों को अभी वैक्सीन लेनी है। लेकिन कई ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने कोविड वैक्सीन की पहली डोज ले ली है और उन्हें लगता है कि दूसरी डोज देरी से लें या न लें, तो भी उन्होंने खुद को संक्रमण के खतरे से सुरक्षित कर लिया है, मगर विशेषज्ञ इस सोच को खारिज कर रहे हैं। इसी से संबंधित हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि सभी लोगों को लिए कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लेना बेहद जरूरी है, संक्रमण से सुरक्षित रखने में दूसरी डोज से बनी मजबूत एंटीबॉडीज महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए अध्ययन के अनुसार, कोविड-19 वैक्सीन की दूसरी खुराक प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है। कोरोना संक्रमण से सुरक्षित रहने के लिए सभी लोगों को वैक्सीन की दोनों खुराक जरूर लेनी चाहिए, दूसरी डोज को किसी भी हाल में छोड़ा नहीं जाना चाहिए। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने यह जानने की कोशिश की, कि वैक्सीन की दूसरी डोज प्रतिरक्षा प्रणाली को किस प्रकार से प्रभावित कर सकती है और कोरोना से सुरक्षा देने में इसकी क्या भूमिका हो सकती है? आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

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दूसरी डोज लेनी क्यों जरूरी?  
हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अगर कोरोना वैक्सीन की पहली डोज ले ली है तो तय समय के बाद दूसरी डोज लेना जरूरी है। अगर वैक्सीन की दूसरी डोज लेने में देरी की तो इससे इम्यूनिटी में कमी आ सकती है। एक्सपर्ट की माने तो वैक्सीन इम्यूनिटी को एक हेल्दी लेवल प्रोवाइड करती है जो वायरस से लड़ने में काफी मददगार है। एक अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि वैक्सीन की पहली डोज शरीर में कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज के स्तर को तो बढ़ा देती है। हालांकि वैक्सीन की दूसरी डोज इन पहले से बनी एंटीबॉडीज को शक्तिशाली बनाने के साथ इसकी मात्रा बढ़ाने के लिए काफी आवश्यक है। इस बारे में स्टैनफोर्ड मेडिसिन के प्रोफेसर बाली पुलेंद्रन कहते हैं, वैक्सीन की पहली डोज की तुलना में दूसरे शॉट के बाद एंटीबॉडीज के स्तर में कई गुना तक वृद्धि देखने को मिली है। अध्ययन के दौरान पाया गया कि पहली डोज के बाद एंटीबॉडीज का टी-कोशिकाएं कम थी, हालांकि दूसरी खुराक के बाद इनमें तेजी से इजाफा देखने को मिला है।इस बारे में स्टैनफोर्ड मेडिसिन के प्रोफेसर बाली पुलेंद्रन कहते हैं, वैक्सीन की पहली डोज की तुलना में दूसरे शॉट के बाद एंटीबॉडीज के स्तर में कई गुना तक वृद्धि देखने को मिली है। अध्ययन के दौरान पाया गया कि पहली डोज के बाद एंटीबॉडीज का टी-कोशिकाएं कम थी, हालांकि दूसरी खुराक के बाद इनमें तेजी से इजाफा देखने को मिला है।