युद्ध प्रिय अमेरिका को युद्ध के स्रोत की जांच भी स्वीकार करनी चाहिए

बीजिंग, 14 सितम्बर (आईएएनएस)। इधर के दो दिनों में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकेन अमेरिकी कांग्रेस की सुनवाई सभा में उपस्थित रहे हैं। अमेरिकी मीडिया के विचार में अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की करारी हार की तरह वापसी पर ब्लिंकेन अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। उनको सख्त पूछताछ का सामना करना पड़ेगा।
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युद्ध प्रिय अमेरिका को युद्ध के स्रोत की जांच भी स्वीकार करनी चाहिए बीजिंग, 14 सितम्बर (आईएएनएस)। इधर के दो दिनों में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकेन अमेरिकी कांग्रेस की सुनवाई सभा में उपस्थित रहे हैं। अमेरिकी मीडिया के विचार में अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की करारी हार की तरह वापसी पर ब्लिंकेन अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। उनको सख्त पूछताछ का सामना करना पड़ेगा।

वास्तव में अमेरिका विश्व में युद्ध का दीवाना देश है। अपने 240 से अधिक साल पुराने इतिहास में अमेरिका ने 200 से अधिक युद्ध छेड़े या उनमें भाग लिया। अमेरिकी प्रभुत्व की सुरक्षा के लिए कुछ अमेरिकी राजनीतिज्ञ अकसर सैन्य उपाय अपनाकर दूसरे देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करते हैं और अमेरिकी मूल्यदर्शन का प्रचार करते हैं। बल प्रयोग पर अंधविश्वास अमेरिकी प्रभुत्तव की एक बड़ी विशेषता है।

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दूसरी तरफ युद्ध छेड़ने के पीछे अमेरिका को आर्थिक लाभ हासिल करने की सोच भी है। पिछले 20 सालों में अमेरिका ने आतंकवाद के विरोध का झंडा उठाकर कई लड़ाई लड़ी, जिससे अमेरिकी सैन्य उद्योग ने मोटा मुनाफा कमाया। अन्य देशों की तुलना में अमेरिकी सैन्य बजट का खर्च चौंकाने वाला है।

अमेरिका अपनी इच्छा के अनुसार दूसरे देश को बदलने की कोशिश भी करता है। हर बार वह असफल रहा ,पर स्थानीय लोग आपदा में फंस गए।

अमेरिका का अनुसरण करने वाले मित्र देशों को युद्ध में लाभ हासिल नहीं हुआ। अफगानिस्तान से सेना हटाने की योजना बनाने के दौरान अमेरिका ने अपने मित्र देशों का ख्याल नहीं रखा।

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(साभार---चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)

--आईएएनएस

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