आगामी एससीओ शिखर बैठक पर पूरे विश्व की नजर

बीजिंग, 14 सितम्बर (आईएएनएस)। ताजिकिस्तान की अध्यक्षता में शांगहाई सहयोग संगठन (एससीओ) की शिखर बैठक दुशांबे में ऑनलाइन और ऑफलाइन के तरीके से 16 और 17 तारीख को आयोजित हो रही है। चालू साल एससीओ की स्थापना की 20वीं वर्षगांठ है। विभिन्न सदस्य देशों ने इसके लिए तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित किये हैं और इस शिखर बैठक की सफलता के लिए अच्छी तैयारी करने के लिए पूरी कोशिश भी की है। इस बैठक में सदस्य देशों के नेता पिछले 20 साल में प्राप्त महत्वपूर्ण अनुभवों और उपलब्धियों का सार करेंगे औ भावी विकास की योजनाएं बनाएंगे। वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक और आर्थिक परिस्थिति के मद्देनजर एससीओ की दुशांबे शिखर बैठक का खास महत्व होगा ,जो पूरे विश्व की नजर खींच रही है।
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आगामी एससीओ शिखर बैठक पर पूरे विश्व की नजर बीजिंग, 14 सितम्बर (आईएएनएस)। ताजिकिस्तान की अध्यक्षता में शांगहाई सहयोग संगठन (एससीओ) की शिखर बैठक दुशांबे में ऑनलाइन और ऑफलाइन के तरीके से 16 और 17 तारीख को आयोजित हो रही है। चालू साल एससीओ की स्थापना की 20वीं वर्षगांठ है। विभिन्न सदस्य देशों ने इसके लिए तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित किये हैं और इस शिखर बैठक की सफलता के लिए अच्छी तैयारी करने के लिए पूरी कोशिश भी की है। इस बैठक में सदस्य देशों के नेता पिछले 20 साल में प्राप्त महत्वपूर्ण अनुभवों और उपलब्धियों का सार करेंगे औ भावी विकास की योजनाएं बनाएंगे। वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक और आर्थिक परिस्थिति के मद्देनजर एससीओ की दुशांबे शिखर बैठक का खास महत्व होगा ,जो पूरे विश्व की नजर खींच रही है।

एससीओ की स्थापना 15 जून 2001 को चीन के शांगहाई में हुई। वर्तमान में उसके 8 सदस्य देश हैं, जिनमें चीन, रूस ,कजाखस्तान ,किर्गिस्तान ,ताजिकिस्तान ,उज्बेकिस्तान ,भारत और पाकिस्तान हैं। इसके अलावा उस के कई पर्यवेक्षक देश और वातार्लाप देश भी हैं। शांगहाई सहयोग संगठन शांगहाई भावना का पालन करता है यानी पारस्परिक विश्वास ,पारस्परिक लाभ ,समानता,सलाह मशविरा ,विविध सभ्यताओं सम्मान और समान विकास का अनुसरण।

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शांगहाई सहयोग संगठन हमेशा सुरक्षा सहयोग को प्राथमिकता देता है। उसने आतंकवाद पर प्रहार करने और उग्रवाद के विरोध पर कई महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेजों की पुष्टि की है, चौतरफा तौर पर आतंकवाद के विरोध ,मादक पदार्थ निषेध ,सीमा ,सूचना सुरक्षा आदि क्षेत्रों का सहयोग भी बढ़ाया है। उसके सदस्य देश नियमित रूप से संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभ्यास करते हैं। इधर के 20 सालों में एससीओ ने सदस्य देशों के सीमांत क्षेत्र की स्थिरता बनाए रखने में बड़ी सफलता पायी है। सुरक्षा मामलों के अलावा एससीओ आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग भी बढ़ाता है और संबंधित तंत्र स्थापित किया गया है। उल्लेखनीय बात है कि इधर के कुछ सालों में एससीओ ने बेल्ट एंड रोड पहल और विभिन्न देशों की विकास रणनीति तथा क्षेत्रीय सहयोग प्रस्ताव के जुड़ाव में अहम भूमिका निभायी और सिलसिलेवार व्यावहारिक परियोजनाएं लागू कीं ,जिसने विभिन्न देशों के विकास में शक्तिशाली ऊर्जा भरी है। इस साल एससीओ ने पहली बार ऊर्जा मंत्रियों और औद्योगिक मंत्रियों की बैठक की। जाहिर है कि एससीओ बाद में ऊर्जा, उद्योग ,आधुनिक तकनीक के सहयोग पर भी जोर देगा। 20वीं वर्षगांठ एक मील का पत्थर है। पहले प्राप्त हुई बड़ी उपलब्धियों के आधार पर एससीओ क्या नया ब्लू प्रिंट बनाएगा ,कोविड-19 महामारी और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के निपटारे में क्या प्रस्ताव रखेगा। ये देखने लायक रहेगा। बताया गया है कि बैठक में लगभग 30 दस्तावेज पारित किये जाएंगे।

गौरतलब है कि रूसी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार इस शिखर बैठक में एससीओ में ईरान की भागीदारी की औपचारिक प्रतिक्रिया शुरू होगी और पर्यवेक्षक देशों और वातार्लाप साझेदार देशों का विस्तार भी होगा। अगर ऐसा हुआ ,तो एससीओ की ताकत व प्रभाव और बढ़ेगा।

निसंदेह अफगानिस्तान मुद्दा इस शिखर बैठक में एक अहम विषय होगा। अफगानिस्तान एससीओ का पर्यवेक्षक देश है। पहले एससीओ ने अफगानिस्तान के साथ संपर्क दल के जरिये अफगानिस्तान की शांतिपूर्ण सलाह प्रक्रिया बढ़ायी थी। अब तालिबान फिर से सत्ता में आया है। अफगानिस्तान के साथ एससीओ की क्या नयी नीति होगी। यह ध्यान देने वाली बात होगी।

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(वेइतुंग ,चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)

--आईएएनएस

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