चतुर्थ नवरात्र: सिंह पर सवार मां कूष्‍मांडा आज करेंगी दुखों को दूर, चौथे नवरात्र ऐसे करें मां की आराधना

ये है पूर्ण पूजन विधि और बीज मंत्र

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न्‍यूज टुडे नेटवर्क। नवरात्र के चौथे दिन आज चतुर्थ नवरात्र के मौके पर व्रत पूजन आदि के साथ पूरे विधि विधान से मां कूष्‍मांडा का पूजन होगा। चतुर्थ स्‍वरूप में मां कूष्‍मांडा भक्‍तों के दुख दूर करने वाली हैं। गुरूवार को मां के तृतीय स्‍वरूप मां चंद्र घंटा का पूजन पूरे विधि विधान से किया गया। कोरोना प्रोटोकाल के बीच मन्दिरों में श्रद्धालुओं ने मां तृतीय नवरात्र को मां चंद्रघंटा के स्‍वरूप का पूजन किया। घरों में भी पूरे विधि विधान और मंत्रोच्‍चारों के साथ मां चंद्रघंटा का पूजन अर्चन किया गया।

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आज शुक्रवार को चतुर्थ स्‍वरूप में मां कूष्‍मांडा का पूजन होगा। विक्रम संवत 2078 चतुर्थ दिवस  शुक्रवार आज का दिन  कूष्मांडा को समर्पित होता है श्रीमद् देवी भागवत पुराण के अनुसार चौथे दिन मां के स्वरूप कूष्मांडा की पूजा करनी चाहिए पुराण में वर्णित है प्रलय से लेकर सृष्टि के आरंभ तक चारों ओर अंधकार ही अंधकार था और सृष्टि एकदम सुन्न थी तब आदिशक्ति ने कुष्मांड का रूप में अंडाकार ब्रह्मांड की रचना की देवी भागवत पुराण में मां के इस रूप का वर्णन इस प्रकार है मां कुष्मांडा शेर पर सवार रहती हैं उनके हाथों में क्रमशः कमल पुष्प बाण धनुष का मंडल चक्र और गदा सुशोभित हैं इनकी आठवें हाथ में माला है जिसमें सभी प्रकार की सिद्धियां हैं मां कुष्मांडा का निवास सूर्यलोक  के मध्य में माना जाता है पुराण के अनुसार केवल मां कुष्मांड का का तेज ही ऐसा है जो सूर्य लोक में निवास कर सकती हैं आदिशक्ति को सूर्य के तेज का कारण भी कहा जाता है यहां तक की मां कुष्मांडा के तेज के कारण ही दसों दिशाओं में प्रकाश फैला हुआ है जिन की उपासना से सभी प्रकार की सिद्धियां और शक्तियां प्राप्त होती हैं सच्चे मन से मां के रूप की आराधना करने पर सभी रोगों का नाश होता है आज माता की उपासना में पेठा यानी कुम्हड़ा का खास महत्व है मां को प्रसाद स्वरूप सूखे मेवे का भोग लगाना चाहिए। मां का पूजन समय  16 तारीख  सायं 6:05 तक रहेगा इस अवधि में मां का जाप पूजन करना श्रेष्ठ रहेगा।

उपासना मंत्र

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वंदे वांछित कामर्थ चंद्रआकृत शेखराम।

सिंह  रूडा अष्टभुजा कुष्मांडा  यशस्विनी।।

जाप मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु मां कुष्मांडका रूपेण संस्थिता नमस्‍तस्‍यै नमस्‍तस्‍यै नमस्‍तस्‍यै नमो नमः।