चैत्र नवरात्र: आज तृतीय स्‍वरूप मां चंद्रघंटा की ऐसे करें पूजा आराधना, मिलेगी वीरता और निर्भीकता

जानिए, ये है पूजा विधि और मंत्र

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न्‍यूज टुडे नेटवर्क। विक्रम संवत 2078 तृतीय दिवस गुरुवार आदिशक्ति माता चंद्रघटा के लिए समर्पित है। माता चंद्रघंटा की आराधना जो कि माता का सर्वाधिक लोकप्रिय अवतार हैं जिसकी पूजा वैष्णो में देवी की जाती है मां की साधना से मन को असीम शांति प्राप्त होती है एवं जातक का मन मणिपूर चक्र में प्रवेश होता है। देवी भागवत के अनुसार रानी की कृपा से अलौकिक वस्तुओं के दर्शन एवं दिव्य सुगंधया का अनुभव होता है। साथ ही  दिव्य ध्वनि भी सुनाई देती है जो कि जातक के लिए अत्यंत सावधान करने के लिए प्रकट मानी जाती है l

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देवी पुराण के अनुसार मां चंद्रघंटा की आराधना से साधक में वीरता एवं निर्भीकता के  साथ ही सौम्यता और विनम्रता का विकास होता है। मां का यह स्वरूप कल्याणकारी है क्योंकि मां व्यक्ति के मन पर अपना स्वामित्व रखती हैं l

मां के स्वरूप का वर्णन करें तो माता के रूप में मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्र है इसलिए इस देवी को चंद्रघंटा कहा जाता है  आपके शरीर का रंग सोने के समान बहुत चमकीला है  अपने इस रुप  के साथ अपने प्रिय वाहन सिंह पर सवार होकर अपने दसों हाथों में खड़क तलवार ढाल गदा पास त्रिशूल चक्र धनुष भरे हुए तरकस लिए मंद मंद मुस्कुरा रही होती हैं माता रानी के इस रूप की पूजा करने से जन्म जन्म का डर खत्म हो जाता है और वह निर्भय हो जाता है साथ ही उसके सभी पाप भी नष्ट हो जाते हैं l

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मां का स्वरूप   दैत्य राज महिषासुर का जब अत्याचार देवताओं पर बढ़ रहा था राजा इंद्र  सहित सभी देवता भयभीत हो गए तब सभी देवताओं की ऊर्जा से माता रानी का पदार्पण हुआ जिस कारण से माता रानी महिषासुर से युद्ध के लिए तैयार हुए और उसको काल काल्वित कर दिया इस प्रकार मां ने सभी आसुरी शक्तियों से संसार को मुक्ति दिलाई l

पूजा विधि 

शास्त्रों के अनुसार माता रानी के समक्ष घी का दीपक चलाएं कलश के जल में गंगाजल मिलाने के साथ ही दूर्वा सुपारी सिक्का केसर चावल बेलपत्र आदि डालना चाहिए माता को पीले फूल चढ़ाएं इसके साथ दूध दही शहद गुड़ घी का पंचामृत अवश्य ही चढ़ाएं लाल अनार गुड मां को भोग में अर्पित करें l

मंत्र 

दरिद्रय  दुख भय हरणी का त्वदन्या

सर्वोपकार करणय सदा अर्चिता l

उपासना मंत्र 

या देवी सर्वभूतेषु चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता नमस्तस्ए नमस्तस्ए नमस्तस्ए नमो नमः बीज मंत्र ॐ ऐं शक्तिऐ नमः l