येदियुरप्पा से गुपचुप मुलाकात हुई तो संन्यास ले लूंगा : सिद्धारमैया

बेंगलुरु, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक में विपक्ष के नेता सिद्धारमैया ने चुनौती दी है कि अगर यह साबित हो जाता है कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा से गुपचुप तरीके से मुलाकात की है, तो वह सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लेंगे।
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येदियुरप्पा से गुपचुप मुलाकात हुई तो संन्यास ले लूंगा : सिद्धारमैया बेंगलुरु, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक में विपक्ष के नेता सिद्धारमैया ने चुनौती दी है कि अगर यह साबित हो जाता है कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा से गुपचुप तरीके से मुलाकात की है, तो वह सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लेंगे।

सिद्धारमैया ने कहा, पिछली बार जब मैं येदियुरप्पा से उनके जन्मदिन पर मिला था। तब से मैं उनसे नहीं मिला। अगर पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी साबित करते हैं कि मैं येदियुरप्पा से मिला, तो मैं राजनीति से संन्यास ले लूंगा। यह कुमारस्वामी हैं जो नियमित रूप से बीएसवाई से मिलते हैं।

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उन्होंने कहा, कुमारस्वामी अनावश्यक रूप से मुद्दों को उठा रहे हैं। वह येदियुरप्पा के सहयोगियों पर किए गए आईटी छापे को मुझसे झूठा जोड़ रहे हैं। वह मुझे निशाना बना रहे हैं क्योंकि उन्हें खतरा महसूस हो रहा है। मैंने अपने राजनीतिक करियर में उनके जैसे कई लोगों को देखा है। कुमारस्वामी ने हाल ही में राजनीति में प्रवेश किया है। मुझे उनसे सबक सीखने की जरूरत नहीं है।

कुमारस्वामी ने कहा था कि आईटी छापेमारी इसलिए की जा रही है क्योंकि येदियुरप्पा ने राज्य में भाजपा को कमजोर करने की योजना बनाने के लिए सिद्धारमैया से गुप्त रूप से मुलाकात की थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि क्योंकि सिद्धारमैया विपक्षी नेता का पद चाहते थे, उन्होंने जद (एस) और कांग्रेस की गठबंधन सरकार को गिरा दिया, जिससे भाजपा सत्ता में आ गई। कुमारस्वामी ने विपक्ष के नेता के पद का वर्णन करने के लिए कठबोली शब्द पुतागोसी का इस्तेमाल किया था।

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उन्होंने कहा, कुमारस्वामी ने विपक्ष के नेता की स्थिति का अपमान करके भारत के संविधान का अपमान किया है। क्या यह वह सम्मान है जो एक पूर्व मुख्यमंत्री संवैधानिक पद को देता है? यहां तक कि उनके पिता एचडी देवेगौड़ा ने भी विपक्ष के नेता के रूप में कार्य किया था जब देवराज उर्स मुख्यमंत्री थे।

उन्होंने आगे कहा, भाजपा में शामिल हुए 17 विधायकों में से 3 जद (एस) के थे। क्या मैंने उन्हें भी भेजा था? साथ ही जब उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव के वोट के दौरान संबोधित किया, तो उन्होंने ऑपरेशन कमला के लिए येदियुरप्पा को दोषी ठहराया और आरोप लगाया कि बीजेपी ने पैसे और पद देकर विधायकों को लुभाया। उन्होंने तब मेरा नाम क्यों नहीं लिया? मैं विधानसभा में ही जवाब देता।

उन्होंने कहा, ऐसे समय में जब गठबंधन सरकार बहुमत खोने वाली थी, कुमारस्वामी अमेरिका में बैठे थे। इसकी क्या जरूरत थी? मैंने उन्हें जल्द से जल्द वापस आने के लिए बुलाया लेकिन वह वहां 9 दिनों तक रहे।

उन्होंने कहा, क्या सीएम वेस्ट एंड होटल से सरकार चला सकते हैं? क्या वह विधायकों, मंत्रियों और अधिकारियों से मिले बिना प्रशासन चला सकते हैं? यही सरकार गिरने का कारण था। मैं वही बात दोहराते हुए थक गया हूं। मैं इस तरह के आरोपों का फिर से जवाब नहीं दूंगा।

उन्होंने सवाल किया, मैंने राजनीतिक लाभ के लिए अपनी विचारधारा या सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। कुमारस्वामी ने 2005 में धर्म सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया और सीएम बनने के लिए भाजपा से हाथ मिला लिया। क्या यह सत्ता के लिए या तपस्या करने के लिए किया गया था?

--आईएएनएस

एसकेके/आरजेएस