मप्र के उपचुनाव में नेताओं की कैंची बनी जुबान

भोपाल 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में हो रहे उपचुनाव के लिए प्रचार धीरे-धीरे गति पकड़ रहा है, इसके साथ ही नेताओं की जुबान भी कैची जैसी और आपस में दूरियां बढ़ाने वाली साबित हो रही हैं।
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मप्र के उपचुनाव में नेताओं की कैंची बनी जुबान भोपाल 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में हो रहे उपचुनाव के लिए प्रचार धीरे-धीरे गति पकड़ रहा है, इसके साथ ही नेताओं की जुबान भी कैची जैसी और आपस में दूरियां बढ़ाने वाली साबित हो रही हैं।

राज्य में तीन विधानसभा क्षेत्रों पृथ्वीपुर, रैगांव और जोबट के अलावा एक संसदीय क्षेत्र खंडवा में उपचुनाव हो रहे हैं। इन उपचुनाव में दोनों प्रमुख दल भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस जीत का लक्ष्य लेकर चल रही है, जिसके लिए वह चुनावी बिसात पर हर तरह के मोहरे चलने में भी गुरेज नहीं कर रही।

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सियासी तौर पर दोनों ही दल जनता के बीच पहुंचकर अपनी बात कह रहे हैं। भाजपा जहां सरकार की योजनाओं का ब्यौरा दे रही है, तो दूसरी ओर कांग्रेस आमजन की समस्याओं को गिना रही है। हालांकि, इस दौरान ऐसे भी बयान आ रहे हैं जो राज्य की सियासत में कड़वाहट पैदा करने वाले हैं।

उप-चुनाव क्षेत्रों में जनसभा में चल रही है और नेता एक दूसरे पर हमले बोल रहे हैं। पिछले दिनों मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की उम्र और स्वास्थ्य को लेकर तंज कसा था, इसके बाद कमलनाथ के तेवर तल्ख हुए थे और उन्होंने शिवराज को रेस की खुली चुनौती दे डाली थी।

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बात यहीं आकर रुक जाती तो ठीक था, मगर बीते रोज कमलनाथ ने तो भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा के अनुभव पर ही सवाल उठा दिया। कमलनाथ के इस बयान पर भाजपा की ओर से तीखी प्रतिक्रिया हुई है और भाजपा के प्रदेश महामंत्री भगवानदास सबनानी ने कमलनाथ के बयान को मयार्दाहीन और उनके मानसिक दिवालियापन का प्रतीक तक बता दिया है, तो दूसरी ओर कांग्रेस को बैकफुट पर आना पड़ा है।

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने कहा है कि कमलनाथ ने अपने बयान में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष की उम्र और अनुभव से खुद की तुलना की है, न कि कोई अमर्यादित टिप्पणी की है।

इसके साथ ही निवाड़ी जिले की पृथ्वीपुर विधानसभा में कांग्रेस प्रत्याषी नितेंद्र सिंह राठौर के प्रचार के लिए पहुॅची कांग्रेस नेत्री संजू जाटव ने तो भाजपा उम्मीदवार शिशुपाल सिंह यादव की तुलना चाइना के माल से कर डाली। जाहिर है, शब्दों के बाण जिस तरह से चल रहे हैं, उसके जल्द थमने के आसार कम दिख रहे हैं।

--आईएएनएस

एसएनपी/आरजेएस