भारत का लक्ष्य उन्नत होना है, मगर पर्यावरण की कीमत पर नहीं : हरदीप पुरी

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को कहा कि भारत का लक्ष्य विकसित देशों की तरह आर्थिक विकास हासिल करना है, लेकिन वह उनके विकास के रास्ते की नकल नहीं करेगा, क्योंकि वह पर्यावरण की कीमत से वाकिफ है।
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भारत का लक्ष्य उन्नत होना है, मगर पर्यावरण की कीमत पर नहीं : हरदीप पुरी नई दिल्ली, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को कहा कि भारत का लक्ष्य विकसित देशों की तरह आर्थिक विकास हासिल करना है, लेकिन वह उनके विकास के रास्ते की नकल नहीं करेगा, क्योंकि वह पर्यावरण की कीमत से वाकिफ है।

उन्होंने कहा, भारत देश के परिवर्तन में अपने शहरों के महत्व को पहचानता है, क्योंकि 2030 तक भारत के शहरी क्षेत्रों के राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में 70 प्रतिशत तक योगदान करने की उम्मीद है। हमें अपनी आर्थिक आकांक्षाओं को प्राप्त करना होगा और अपनी पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को महसूस करना होगा।

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उन्होंने संयुक्त राष्ट्र विश्व पयार्वास दिवस 2021 पर एक कार्यक्रम में कार्बन मुक्त दुनिया के लिए शहरी कार्रवाई में तेजी विषय पर अपने संबोधन में नई और नवीन निम्न-कार्बन प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, मंत्रालय का लक्ष्य ऐसी तकनीकों को विकसित करना है जो सभी के लिए आवास, सेवा वितरण और बेहतर गतिशीलता सुनिश्चित करें, और लोगों को अधिक कार्बन पदचिह्न् पैदा किए बिना, स्थायी शहरी विकास में सबसे आगे रखें।

पुरी ने कहा, एक कार्बन मुक्त विश्व के लिए शहरी कार्य में तेजी न केवल उपयुक्त है, बल्कि भारत के संदर्भ में भी बहुत प्रासंगिक है। बढ़ते वैश्विक शहरी पदचिह्न् शहरों में अधिक ऊर्जा की मांग करते हैं जो पहले से ही ग्रीनहाउस गैस (जीएचजी) उत्सर्जन वैश्विक ऊर्जा खपत के 78 प्रतिशत और 70 प्रतिशत ऊर्जा खपत के लिए जिम्मेदार हैं।

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उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन मानव बस्तियों को कमजोर बनाता है, विशेष रूप से हाशिए पर रहने वाले और शहरी गरीबों के लिए, जो अत्यधिक मौसम की घटनाओं के संपर्क में हैं।

--आईएएनएस

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भारत 2019 में जलवायु परिवर्तन से सातवां सबसे अधिक प्रभावित देश था, जिसका सबसे अधिक प्रभाव उसके शहरों ने महसूस किया।

1870-2017 से भारत का संचयी उड2 उत्सर्जन बहुत कम है - केवल 3 प्रतिशत पर, जबकि अमेरिका द्वारा 25 प्रतिशत, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन द्वारा 22 प्रतिशत और चीन का 13 प्रतिशत है।

--कअठर