बंगाल में दुर्गा पूजा में शामिल सभी लोगों के लिए टीकाकरण जरूरी

कोलकाता, 15 जुलाई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में विभिन्न दुर्गा पूजा समितियों के आयोजकों ने सभी कोविड सुरक्षा प्रोटोकॉल को बनाए रखते हुए बंगालियों के वार्षिक उपहार का जश्न मनाने के लिए कमर कस ली है। दुर्गा पूजा में अब महज तीन महीने बचे हैं।
 | 
बंगाल में दुर्गा पूजा में शामिल सभी लोगों के लिए टीकाकरण जरूरी कोलकाता, 15 जुलाई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में विभिन्न दुर्गा पूजा समितियों के आयोजकों ने सभी कोविड सुरक्षा प्रोटोकॉल को बनाए रखते हुए बंगालियों के वार्षिक उपहार का जश्न मनाने के लिए कमर कस ली है। दुर्गा पूजा में अब महज तीन महीने बचे हैं।

इसके एक हिस्से के रूप में, कोलकाता में दुर्गा पूजा समितियों ने अगले तीन महीनों में उन सभी का टीकाकरण करने का फैसला किया है, जो अनुष्ठान और अन्य संबंधित कार्यो में शामिल हैं।

Bansal Saree

फोरम फॉर दुर्गोत्सव के अधिकारी पार्थ घोष ने कहा, हमारे सदस्यों और स्थानीय लोगों से लेकर पंडालों में बार-बार आने वाले कारीगरों, पुजारियों, ढाकी और इलेक्ट्रीशियन तक - सभी को अगले तीन महीनों में कोविड के टीके लगवाने होंगे।

पूजा समितियां यह भी सुनिश्चित करेंगी कि पंडालों में आने वाले लोग नाक और मुंह को ढककर मास्क पहनें और सामाजिक दूरी बनाए रखें।

Devi Maa Dental

हम उम्मीद करते हैं कि सभी को दोनों खुराक मिल जाएगी, लेकिन पूजा से दो-तीन दिन पहले गांवों से आने वाले ढाकी (पारंपरिक ढोलकिया) केटीकाकरण पर हमारा नियंत्रण नहीं है, इसलिए हम कुछ भी आश्वस्त नहीं कर सकते हैं, लेकिन हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि उन्हें कम से कम एक खुराक मिले।

फोरम फॉर दुर्गोत्सव, कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में 550 सामुदायिक दुर्गा पूजाओं का एक संगठन है, जो यह भी सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश प्रकाशित करता है कि उत्सव कोविड-सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए आयोजित किए जाएं।

पिछले साल राज्य सरकार ने पंडालों के अंदर भीड़ को रोकने के लिए दुर्गा पूजा के उत्सव पर प्रतिबंध लगा दिया था। पूजा आयोजक अच्छी तरह से जानते हैं कि राज्य सरकार कोरोनोवायरस की तीसरी लहर के खतरे को देखते हुए इसी तरह के प्रतिबंध लगा सकती है, सभी सुरक्षा कोविड प्रोटोकॉल को बनाए रखते हुए पूजा मनाने की पूरी तैयारी कर रही है।

पंडालों का निर्माण इस तरह से किया जाना है कि भक्त मूर्तियों को दूर से देख सकें और उन्हें पास आने की आवश्यकता नहीं है।

शिबमंदिर दुर्गा पूजा के सदस्य घोष ने कहा, हमारी तरह हर भीड़-खींचने वाली पूजा समिति के लिए चुनौती यह होगी कि संतुलन कैसे बनाया जाए ताकि पंडालों का निर्माण सौंदर्यशास्त्र को बनाए रखते हुए किया जा सके जबकि मूर्तियों को दूर से देखा जा सके।

शहर में दुर्गा पूजा समितियां भी डिजिटल उपस्थिति पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लोग घर से कलाकृतियों को देख सकें।

उत्तरी कोलकाता में दुर्गा पूजा समिति के एक अन्य अधिकारी ने कहा, हम मूर्ति और सजावट को सोशल मीडिया पर इस तरह से पेश करेंगे कि लोगों को पंडाल में आने की इच्छा न हो।

--आईएएनएस

आरएचए/एएनएम