बंगाल भाजपा ने बनाई समस्याओं से निपटने की रणनीति

कोलकाता, 19 जुलाई (आईएएनएस)। पार्टी की मौजूदा समस्या से निपटने और लोगों तक पहुंचने के लिए भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई ने कई रणनीतियां बनाई हैं। प्रदेश भाजपा नेतृत्व ने न केवल लोगों के साथ अपने अंतर्वैयक्तिक (इंटर-पर्सनल) संबंध बढ़ाने की योजना बनाई है, बल्कि असंतुष्ट नेताओं को संभालने के लिए एक रूपरेखा भी तैयार की है।
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बंगाल भाजपा ने बनाई समस्याओं से निपटने की रणनीति कोलकाता, 19 जुलाई (आईएएनएस)। पार्टी की मौजूदा समस्या से निपटने और लोगों तक पहुंचने के लिए भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई ने कई रणनीतियां बनाई हैं। प्रदेश भाजपा नेतृत्व ने न केवल लोगों के साथ अपने अंतर्वैयक्तिक (इंटर-पर्सनल) संबंध बढ़ाने की योजना बनाई है, बल्कि असंतुष्ट नेताओं को संभालने के लिए एक रूपरेखा भी तैयार की है।

विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान टीएमसी के चुनावी रणनीतिकार द्वारा दिए गए दीदी को बोलो की तर्ज पर राज्य भाजपा ने लोगों तक पहुंचने के लिए विधायक को बोलो (अपने विधायक से बात करें) नारे के साथ जुटने की रणनीति तैयार की है। यह योजना पार्टी के आईटी सेल के राष्ट्रीय प्रभारी और पश्चिम बंगाल के केंद्रीय पर्यवेक्षक अमित मालवीय के दिमाग की उपज है।

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इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए भाजपा के एक वरिष्ठ विधायक ने कहा कि सभी 75 विधायकों को अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुप शुरू करने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा, संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता सीधे अपने विधायकों के पास अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। प्रत्येक विधायक को शिकायतों की प्राप्ति के 48 घंटे के भीतर शिकायतों और समाधान खोजने के लिए पहल करने का निर्देश दिया गया है।

एक अन्य वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, हमने स्वीकार किया है कि टीएमसी के दीदी को बोलो ने हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में पार्टी के लिए चुनावी लाभ उठाया है। अब, हम चाहते हैं कि हमारे निर्वाचित विधायक अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में गहन जनसंपर्क अभ्यास पर ध्यान केंद्रित करें। इसलिए, हमने विधायक को बोलो कार्यक्रम शुरू करने का फैसला किया है।

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जहां तक असंतुष्ट भाजपा नेताओं - मुख्य रूप से टीएमसी से पलायन करने वालों का संबंध है, भगवा ब्रिगेड ने इसे लेकर भी रणनीति तैयार की है।

पार्टी के एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा, नेता दो तरह के हैं। एक वे हैं, जिन्होंने खुलकर अपनी नाराजगी व्यक्त की है और सार्वजनिक रूप से पार्टी की छवि को खराब किया है और कुछ ऐसे भी हैं, जो पार्टी की गतिविधियों से खुश नहीं हैं, लेकिन चुप रहना पसंद करते हैं और पार्टी नेतृत्व के साथ इस पर चर्चा करते हैं। पार्टी इन दोनों श्रेणियों को अलग-अलग मानेगी।

सरल शब्दों में कहें तो सौमित्र खान, राजीव बंदोपाध्याय और सब्यसाची दत्ता जैसे विद्रोही रवैये वाले नेताओं के लिए, भाजपा के राज्य नेतृत्व का ²ष्टिकोण कड़वा या सख्त होगा। दूसरी ओर, रथिन चक्रवर्ती और बैशाली डालमिया जैसे नेताओं के लिए, ²ष्टिकोण मीठा यानी नरम होगा।

एक ओर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि इस समय दलबदलुओं को कोई बड़ी भूमिका न दी जाए और दूसरी ओर, विपक्ष के नेता उन अन्य दलबदलुओं तक पहुंच रहे हैं, जिन्होंने खुले तौर पर देश में चल रहे मामलों पर अपनी नाराजगी व्यक्त नहीं की है।

--आईएएनएस

एकेके/एएनएम