कृषि मशीनरी, अन्य कदम इस मौसम में वायु प्रदूषण को रोकेंगे : कृषि सचिव

नई दिल्ली, 13 सितंबर (आईएएनएस)। कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने कहा है कि पंजाब और हरियाणा के लिए क्रमश: 235 करोड़ रुपये और 141 करोड़ रुपये फसल अवशेष प्रबंधन और केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए अन्य उपायों से वायु प्रदूषण की समस्या का काफी हद तक समाधान हो जाएगा।
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कृषि मशीनरी, अन्य कदम इस मौसम में वायु प्रदूषण को रोकेंगे : कृषि सचिव नई दिल्ली, 13 सितंबर (आईएएनएस)। कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने कहा है कि पंजाब और हरियाणा के लिए क्रमश: 235 करोड़ रुपये और 141 करोड़ रुपये फसल अवशेष प्रबंधन और केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए अन्य उपायों से वायु प्रदूषण की समस्या का काफी हद तक समाधान हो जाएगा।

इस वर्ष के आवंटन सहित, केंद्रीय क्षेत्र फसल अवशेषों के स्वस्थानी प्रबंधन के लिए कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा योजना के तहत, कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग ने 2018-19 से पंजाब के लिए 1050.68 करोड़ रुपये और हरियाणा के लिए 640.9 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं किसानों को सब्सिडी पर फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के लिए और जन जागरूकता के लिए सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) गतिविधियों को शुरू करने के लिए।

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ये मशीनें सुनिश्चित करती हैं कि उत्तर-पश्चिम भारत में किसानों को पराली जलाने के बजाय अगली बुवाई से पहले फसल के अवशेषों को पूरी तरह से हटा दिया जाए। 2016-17 के बाद से, प्रदूषण की धुंध दिल्ली-एनसीआर और पूरे उत्तर-पश्चिम भारत में हफ्तों तक, विशेष रूप से सर्दियों से पहले और उसके दौरान एक साथ रहती है। प्रदूषण के कई स्रोतों में से एक है पंजाब और हरियाणा में किसानों द्वारा पराली जलाना।

छोटे और सीमांत किसानों को किराए पर मशीनें और उपकरण उपलब्ध कराने के लिए राज्यों ने केंद्रीय कोष से 30,900 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए हैं। इन अनुदानित केंद्रों और किसानों को 1.58 लाख से अधिक फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों की आपूर्ति की गई है।

अग्रवाल ने कहा, 2020 सीजन में, इस योजना के माध्यम से, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पंजाब राज्यों में 2016 की तुलना में धान अवशेष जलाने के मामलों की संख्या में क्रमश: 64 प्रतिशत, 52 प्रतिशत और 23 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

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अग्रवाल ने एक बातचीत के दौरान मीडियाकर्मियों से कहा, इस साल भी, पंजाब और हरियाणा के लिए योजना आवंटन के साथ-साथ केंद्र सरकार द्वारा किए गए कई अन्य उपायों के साथ, पराली जलाने की समस्या पहले की तरह गंभीर नहीं होनी चाहिए।

राज्यों से कहा गया है कि वे समस्याओं और कमियों की पहचान कर गांव और ब्लॉक स्तर पर सूक्ष्म स्तर पर योजना बनाकर फसल अवशेष जलाने को कम करने के लिए रणनीति तैयार करें।

--आईएएनएस

एसजीके