सलमान खुर्शीद की पत्नी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी

फरुर्खाबाद (उत्तर प्रदेश), 21 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय अनुदान में प्राप्त 71 लाख रुपये से अधिक की हेराफेरी के मामले में एक स्थानीय अदालत ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद की पत्नी लुईस खुर्शीद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। डॉ जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट लुईस खुर्शीद के द्वारा संचालित किया जाता है।
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सलमान खुर्शीद की पत्नी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी फरुर्खाबाद (उत्तर प्रदेश), 21 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय अनुदान में प्राप्त 71 लाख रुपये से अधिक की हेराफेरी के मामले में एक स्थानीय अदालत ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद की पत्नी लुईस खुर्शीद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। डॉ जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट लुईस खुर्शीद के द्वारा संचालित किया जाता है।

मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रवीण कुमार त्यागी ने मंगलवार को लुईस खुर्शीद और ट्रस्ट के सचिव अतहर फारूकी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करते हुए मामले की सुनवाई की अगली तारीख 16 अगस्त तय की है।

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लुईस खुर्शीद ट्रस्ट की प्रोजेक्ट डायरेक्टर थीं।

मार्च 2010 में, ट्रस्ट को उत्तर प्रदेश के 17 जिलों में विकलांग व्यक्तियों के बीच व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल और श्रवण यंत्र के वितरण के लिए केंद्र सरकार से 71.50 लाख रुपये का अनुदान मिला था।

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बाद में, 2012 में ट्रस्ट के पदाधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और जालसाजी के आरोप लगाए गए, जब खुर्शीद तत्कालीन यूपीए सरकार में मंत्री थे। हालांकि खुर्शीद परिवार ने इन आरोपों से इनकार किया है।

आर्थिक अपराध शाखा ने एक जांच शुरू की और जून 2017 में और ईओडब्ल्यू निरीक्षक राम शंकर यादव ने यहां कायमगंज पुलिस स्टेशन में लुईस खुर्शीद और फारूकी के खिलाफ एफ आई आर दर्ज की।

इस मामले में चार्जशीट 30 दिसंबर 2019 को दाखिल की गई थी।

यह आरोप लगाया गया था कि उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों के हस्ताक्षर जाली थे और उनकी नकली मुहरों का इस्तेमाल विकलांगों के कल्याण के लिए केंद्र सरकार से अनुदान प्राप्त करने के लिए किया गया था।

ट्रस्ट ने कहा था कि उसने एक दर्जन से अधिक जिलों - एटा, इटावा, फरुर्खाबाद, कासगंज, मैनपुरी, अलीगढ़, शाहजहांपुर, मेरठ, बरेली, मुरादाबाद, गौतम बुद्ध नगर, रामपुर, संत कबीर नगर और में विकलांग बच्चों के लिए शिविर आयोजित किए थे।

बाद में यह आरोप लगाया गया कि विकलांगों के लिए शिविर केवल कागजों पर मौजूद थे।

--आईएएनएस

एनपी/आरजेएस