बुलडोजर पर राजनीति से गुजरात में मतदाताओं की लामबंदी तय!

अहमदाबाद, 14 मई (आईएएनएस)। गुजरात में सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने राज्य के कुछ हिस्सों में बुलडोजर की राजनीति शुरू कर दी है और इसे लेकर राजनीतिक विश्लेषकों की राय बंटी हुई है।
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बुलडोजर पर राजनीति से गुजरात में मतदाताओं की लामबंदी तय! अहमदाबाद, 14 मई (आईएएनएस)। गुजरात में सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने राज्य के कुछ हिस्सों में बुलडोजर की राजनीति शुरू कर दी है और इसे लेकर राजनीतिक विश्लेषकों की राय बंटी हुई है।

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा को इसका राजनीतिक लाभ होगा तो कुछ का कहना है कि यह कदम दोधारी तलवार की तरह है। उनके अनुसार, मुस्लिमों के साथ गरीब और मध्यमवर्गीय हिंदुओं को भी काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

भाजपा की सोच है कि उसके इस कदम से बहुत ही कम संख्या में हिंदू प्रभावित होंगे और इसी कारण उनकी कम संख्याबल का असर चुनाव पर भी कम ही पड़ेगा।

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रामनवमी के त्योहार के अवसर पर राज्य के कई हिस्सों में निकाली गई शोभायात्राओं के दौरान हिंदुओं को निशाना बनाया गया और उन पर पथराव किया गया। सरकार ने पथराव करने वाले लोगों के अवैध निर्माण को तत्काल ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी।

मध्यप्रदेश की राह पर चलते हुये गुजरात सरकार ने खंभात शहर में पहली बार अवैध निर्माण ध्वस्त करने के लिये जेसीबी का इस्तेमाल किया और एक बूचड़खाने को ढहा दिया।

इसके बाद हिम्मतनगर, मोदासा, कादी, बोताद जैसे शहरों तथा अहमदाबाद, सूरत और राज्य के अन्य हिस्सों में भी बुलडोजर से अवैध निर्माण गिराये गये।

विश्व हिंदू परिषद के रणछोड़ भारवाड ने कहा कि हर क्रिया की विपरीत प्रतिक्रिया होती है। उन्होंने कहा कि अगर असामाजिक और देशद्रोही तत्वों ने रामनवमी की शोभायात्रा पर हमला नहीं किया होता तो उन्हें सरकार की कार्रवाई का खामियाजा नहीं भुगतना पड़ता।

अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद के प्रवक्ता नीरज वघेला ने कहा कि ये अवैध निर्माण देश विरोधी गतिविधियों का अड्डा बन गये हैं। हिंदू समुदाय और देश की अखंडता की रक्षा के लिये इन्हें ध्वस्त करना जरूरी है।

वघेला ने कहा कि सरकार की कार्रवाई को राजनीति या चुनावी लाभ के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिये और न ही इस कार्रवाई के समय को लेकर सवाल खड़े करने चाहिये। महत्वपूर्ण यह है कि देश विरोधी तत्वों को सबक सीखाया जाये।

उन्होंने कहा कि राज्य में रोहिंग्या और बंगलादेशी बड़ी संख्या में अवैध रूप से रह रहे हैं और ये लोग देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त हैं। इनकी बड़ी आबादी अहमदाबाद के चंडोला लेक इलाके में रह रही है और राज्य की पुलिस को इनकी पहचान करनी चाहिये तथा इन्हें वापस बंगलादेश भेजा जाना चाहिये।

अगर वघेला की बात मानी जाये तो सिर्फ मुस्लिमों के अवैध निर्माण ध्वस्त किये गये हैं लेकिन वास्तव में बुलडोजर हिंदुओं के निर्माण पर भी चला है।

ऐसे ही एक पीड़ित हैं पराग पटेल, जिनका अहमदाबाद के बाहरी इलाके में बना आइसक्रीम पार्लर ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने अहमदाबाद शहरी विकास प्राधिकरण के अधिकारियों से समय की मांग की लेकिन उनकी गुहार को नहीं सुना गया।

पराग ही सिर्फ इस बुलडोजर राजनीति के शिकार हों ऐसा नहीं है। मेहसाणा जिले के कादी शहर में गत चार दिनों में 550 प्रॉपर्टी ध्वस्त कर दी गई। यह कार्रवाई सड़क पर अतिक्रमण को हटाने के लिये की गई। कारोबारियों ने समय की मांग की लेकिन बुलडोजर यथावत चलता रहा। इस अभियान के पीड़ित भी अधिकतर हिंदू ही थे।

अहमदाबाद में ही रानिप इलाके के बकरा मंडी में 280 प्रॉपर्टी पर भी तलवार लटक रही है। मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं वकील शमशाद पठान ने कहा कि इनमें से 100 प्रॉपर्टी दलितों, ठाकुर और देवीपूजक हिंदुओं के हैं। यहां मुस्लिमों की भी प्रॉपर्टी है।

पठान ने कहा कि अगर सरकार अवैध निर्माण को गिरा रही है तो मानवाधिकार तथा सामाजिक कार्यकर्ता उनका ही साथ देंगे। हालांकि, यहां सरकार अतिक्रमण हटाने की आड़ में गरीबों और निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों को सड़क पर ला रही या उनकी आजीविका छीन रही है। भाजपा शायद एक ऐसा भारत बनाना चाहती है, जहां कोई गरीब न हो और कोई निम्न मध्यम वर्ग का न हो।

उन्होंने कहा कि भाजपा को इसका लाभ होगा क्योंकि वह यह प्रचारित कर रही है कि सिर्फ मुस्लिमों की प्रॉपर्टी को निशाना बनाया जा रहा है और मध्यम वर्ग तथा उच्च मध्यम वर्ग इसका स्वागत करता है।

राज्य सरकार का कहना है कि वह अवैध निर्माण को ढाह रही है लेकिन यहां लोगों को तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं को अतिक्रमण से सरकारी जमीन को मुक्त कराने के लिये संघर्ष करना पड़ता है।

चंदूजी दरबार ऐसे ही कार्यकर्ता हैं। उन्होंने अभी हाल ही में वीरमगाम मामलातदार कार्यालय के बाहर धरना दिया। वह 2019 से ही इसके लिये संघर्ष कर रहे हैं कि रेलवे स्टेशन तथा रोकड़िया हनुमान मंदिर के पास सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाया जाये। अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई।

तत्कालीन राजस्व मंत्री कौशिक पटेल ने 2021 में कहा था कि अतिक्रमण और जमीन कब्जा करने के 345 मामले दर्ज किये गये थे। इनका बाजार मूल्य 730 करोड़ रुपये था।

राजस्व विभाग ने कहा कि आपराधिक जांच शुरू होने के अलावा सरकारी भूमि को कब्जे से मुक्त करने की कोई खबर नहीं आई है।

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता मनीष दोषी ने कहा कि इस बुलडोजर राजनीति का मुख्य लक्ष्य मतदातओं को लामबंद करना है लेकिन राज्य में इस बार यह नीति काम नहीं करेगी। जनता अब समझ गई है कि भाजपा बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुख्य मुद्दों से उनका ध्यान भटकाने के लिये ऐसा कर रही है।

राजनीतिक विश्लेषक एवं अर्थशास्त्री हेमंत शाह ने कहा कि सरकार की कार्रवाई अवैध है। उन्होंने कहा कि जब सरकार इम्पैक्ट फी कानून लागू की हुई है तो वह अवैध निर्माण को ध्वस्त कैसे कर सकती है। उन्होंने बताया कि इम्पैक्ट फी कानून के तहत अवैध निर्माण पर फीस वसूली जाती है, जिससे वह निर्माण वैध हो जाता है।

शाह ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सिर्फ मुस्लिमों की प्रॉपर्टी को निशाना बना रही है। इससे उन्हें आने वाले चुनाव में लाभ हो लेकिन यह लाभ कितना होगा, यह बहुत बड़ा सवाल है।

--आईएएनएस

एकेएस/आरएचए