पंजशीर रक्तपात के बाद ताजिकों ने एससीओ शिखर सम्मेलन में इमरान के बहिष्कार की मांग की

नई दिल्ली, 11 सितम्बर (आईएएनएस)। अफगानिस्तान में पाकिस्तानी हस्तक्षेप से नाराज ताजिकिस्तान के प्रदर्शनकारी ताजिक राजधानी दुशांबे में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के आगामी शिखर सम्मेलन के दौरान इमरान खान के बहिष्कार की मांग कर रहे हैं।
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पंजशीर रक्तपात के बाद ताजिकों ने एससीओ शिखर सम्मेलन में इमरान के बहिष्कार की मांग की नई दिल्ली, 11 सितम्बर (आईएएनएस)। अफगानिस्तान में पाकिस्तानी हस्तक्षेप से नाराज ताजिकिस्तान के प्रदर्शनकारी ताजिक राजधानी दुशांबे में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के आगामी शिखर सम्मेलन के दौरान इमरान खान के बहिष्कार की मांग कर रहे हैं।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री एससीओ शिखर सम्मेलन में आमंत्रित लोगों में से एक हैं, जिनकी छवि 15 अगस्त को काबुल पर तालिबान के अधिग्रहण के बाद अफगानिस्तान में अराजकता से प्रभावित होने की संभावना है। पाकिस्तानी आईएसआई प्रमुख फैज हमीद के समर्थन के साथ काबुल में जातीय ताजिकों के खिलाफ हवाई हमले करने के बाद ताजिक नाराज हो गए हैं, जिन्होंने प्रसिद्ध पंजशीर घाटी में तालिबान विरोधी संकल्प लिया था।

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अप्रत्याशित रूप से, जैसे ही ताजिक राजधानी 16 सितंबर से शुरू होने वाली सभी महत्वपूर्ण एससीओ काउंसिल ऑफ स्टेट्स ऑफ स्टेट्स की बैठक की मेजबानी करने के लिए तैयार है, उसी बीच देश के नागरिक समाज समूहों ने इमोमाली रहमोन के नेतृत्व वाली सरकार से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को इसमें शामिल होने से रोकने का आग्रह किया है।

शुक्रवार को, ताजिक नागरिक समाज ने देश के अधिकारियों से खान की दुशांबे यात्रा को स्थगित करने का आग्रह किया है। जब तक कि पाकिस्तान अफगानिस्तान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने से इनकार नहीं करता और काबुल में एक समावेशी सरकार नहीं बनाई जाती, तब तक खान को दरकिनार करने की मांग तेज हो गई है।

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पाकिस्तान विरोधी भावना तभी से मजबूत हुई है, जब तालिबान ने उत्तरी अफगानिस्तान की पंजशीर घाटी में अहमद मसूद, अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह और उनके ताजिक लड़ाकों द्वारा प्रतिरोध को खत्म करने के लिए पाकिस्तान समर्थित सैन्य अभियान शुरू किया है।

फेसबुक पर पोस्ट किए गए एक बयान में, नागरिक समाज समूह ने कहा कि तालिबान पाकिस्तान की कठपुतली साबित हुआ है और इसे अपने विरोधियों को नष्ट करने के लिए इस्लामाबाद की जरूरत है।

दुशांबे की अवेस्ता न्यूज एजेंसी ने सोशल मीडिया पोस्ट के हवाले से कहा, हम अफगानिस्तान के आंतरिक मामलों में पाकिस्तान के हस्तक्षेप की, विशेष रूप से पंजशीर के निवासियों की बमबारी में पाकिस्तान के सैन्य विमानों की भागीदारी की निंदा करते हैं।

बयान में आगे कहा गया है, हम मानते हैं कि इन दिनों और रातों में, जब लाखों ताजिकिस्तानियों का दिल काबुल और पंजशीर में लोगों की हत्या के कारण दुख रहा है, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की दुशांबे की आगामी यात्रा, ताजिकिस्तान में उनकी बैठक अवांछित है।

इस अपील पर देश के प्रमुख मानवाधिकार एक्टिविस्ट्स, वकीलों, पत्रकारों, दार्शनिकों, इतिहासकारों आदि ने हस्ताक्षर किए हैं।

इसमें ओयनिहोल बोबोनाजारोवा जैसे नाम शामिल हैं, जो ताजिकिस्तान के सबसे प्रसिद्ध मानवाधिकार एक्टिविस्ट्स में से एक हैं और जिन्होंने देश का राष्ट्रपति चुनाव भी लड़ा है। इसके अलावा हस्ताक्षर करने वालों में प्रसिद्ध फिल्म प्रोड्यूसर अनीसा सबिरी भी शामिल हैं।

अपने खुले संबोधन में, ताजिक नागरिक समाज ने ताजिकिस्तान के विदेश मामलों के मंत्रालय से तब तक पाकिस्तानी पीएम की दुशांबे यात्रा को स्थगित करने का आग्रह किया है, जब तक कि पाकिस्तान अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के राजनीतिक और सैन्य समर्थन को अस्वीकार नहीं कर देता और इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में चर्चा नहीं हो जाती है तथा पड़ोसी देश में एक समावेशी सरकार नहीं बन जाती।

अपील में कहा गया है, हमारी राय में, ताजिकिस्तान और शंघाई सहयोग संगठन के अन्य देश पाकिस्तान के हस्तक्षेप और स्थानीय आबादी की जातीय सफाई के बारे में तथ्यों की जांच के लिए एक विशेष आयोग स्थापित करने और इसे पंजशीर और अफगानिस्तान के अन्य क्षेत्रों में भेजने के लिए बाध्य हैं।

समूह ने कहा कि तालिबान और पाकिस्तानी सेना द्वारा विशेष रूप से पंजशीर में किए गए अपराधों के एकत्र किए गए सबूतों को संबंधित अंतरराष्ट्रीय संगठनों, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र को भेजा जाना चाहिए।

एक्टिविस्ट्स ने कहा, दुर्भाग्य से पंजशीर में अफगान पीपुल्स रेसिस्टेंस फ्रंट के खिलाफ पाकिस्तानी सेना के एक बड़े पैमाने पर ऑपरेशन की शुरूआत, ताजिकों का नरसंहार, काबुल और हेरात में महिला विद्रोह का दमन और काबुल में एक नाजी तालिबान सरकार का निर्माण, जो हालांकि अस्थायी माना जा रहा है, पहले विकसित तालिबान परि²श्य के अस्तित्व को इंगित करता है। यह अब विश्व समुदाय और अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों के लिए अत्यधिक चिंता का विषय बन गया है।

नागरिक समाज समूह, जिन्होंने पिछले कुछ दशकों में ताजिकिस्तान के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, उन्हें अब डर है कि अफगानिस्तान में मौजूदा स्थिति से न केवल अफगान गृहयुद्ध बल्कि संपूर्ण मध्य एशिया में एक लंबी अस्थिरता हो सकती है।

इससे पहले इंडिया नैरेटिव द्वारा रिपोर्ट किया गया था कि ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन ने पिछले महीने पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को पाकिस्तान समर्थित तालिबान द्वारा अफगानिस्तान के अन्य जातीय समूहों की पीठ में छुरा घोंपने पर दुशांबे की अत्यधिक नाराजगी से अवगत कराया था।

रहमोन ने कुरैशी से कहा था कि अफगानिस्तान की भविष्य की सरकार में ताजिकों का एक योग्य स्थान है और दुशांबे ऐसे किसी भी अन्य शासन को मान्यता नहीं देगा, जो पूरे अफगान लोगों की स्थिति को ध्यान में रखे बिना, विशेष रूप से सभी इसके राष्ट्रीय अल्पसंख्यकों को ध्यान में रखे बिना उत्पीड़न के माध्यम से खड़ा किया गया होगा।

यह, निश्चित रूप से, खूनी रविवार (5 सितंबर) से बहुत पहले सामने आया था, जब पाकिस्तानी ड्रोन, हेलीकॉप्टर और विशेष बलों ने कथित तौर पर पंजशीर में ताजिकों को कुचलने के लिए तालिबान लड़ाकों के साथ एक संयुक्त अभियान शुरू किया था।

न केवल ताजिकिस्तान बल्कि रूस और ईरान भी पंजशीर के खूनखराबे के बाद गुस्से से भरे हुए हैं और इसी बीच अब इमरान खान को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।

(यह आलेख इंडिया नैरेटिव डॉट कॉम के साथ एक व्यवस्था के तहत लिया गया है)

--इंडिया नैरेटिव

एकेके/एएनएम