डिजिटल इंडिया के लिए इंटरनेट का समावेशी विस्तार जरूरी, कंटेंट की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए : केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव

नई दिल्ली , 25 नवंबर ( आईएएनएस)। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी, संचार एवं रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि इंटरनेट अर्थव्यवस्था और समाज का अभिन्न हिस्सा बन गया है, इसलिए इंटरनेट के जरिए आने वाले हर तरह के कंटेंट की जिम्मेदारी तय करना समय की मांग है।
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डिजिटल इंडिया के लिए इंटरनेट का समावेशी विस्तार जरूरी, कंटेंट की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए : केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव नई दिल्ली , 25 नवंबर ( आईएएनएस)। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी, संचार एवं रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि इंटरनेट अर्थव्यवस्था और समाज का अभिन्न हिस्सा बन गया है, इसलिए इंटरनेट के जरिए आने वाले हर तरह के कंटेंट की जिम्मेदारी तय करना समय की मांग है।

पहले भारत इंटरनेट गवर्नेंस फोरम- 2021 का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, पिछले कुछ सालों में इंटरनेट जितनी तेजी से बढ़ा है और बदला है । इसे देखते हुए अब हमें इंटरनेट के भविष्य के बारे में भी अलग तरह से सोचना होगा। हाल के दिनों में मोबाइल पर इंटरनेट का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और इसमें बच्चे और युवा भी शामिल है। इंटरनेट के जरिए जो कुछ भी उनके पास जा रहा है , वो उनकी सोच को प्रभावित भी कर रहा है। ऐसे में इंटरनेट के जरिए भेजे जाने वाले कंटेंट की जिम्मेदारी तय करना बहुत जरूरी मुद्दा बन गया है।

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अश्विनी वैष्णव ने कार्यक्रम में इंटरनेट के भविष्य के बारे में 5 मंत्र देते हुए कहा, भाजपा सरकार की नीति समग्र और समावेशी विकास की है। इसलिए इंटरनेट के भविष्य की नीति बनाते समय यह ध्यान रखना होगा कि जिन लोगों के पास अभी तक इंटरनेट नहीं पहुंच पाया है , उन तक इसे कैसे पहुंचाया जाए।

उन्होने कहा कि इंटरनेट तक सबकी पहुंच होनी चाहिए ताकि सभी इसका इस्तेमाल कर सके और सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का ज्यादा से ज्यादा ऑनलाइन तरीके से लाभ हासिल कर सके।

वैष्णव ने इंटरनेट और डिजिटल तकनीक के विस्तार की नीति बनाते समय जलवायु परिवर्तन के मुद्दे का भी ध्यान रखने की सलाह देते हुए कहा कि इसके सामाजिक असर का भी ध्यान रखना जरूरी है। ई-कॉमर्स का उदाहरण देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इसका असर उन लोगों पर पड़ रहा है जो अभी तक इस बदलाव के साथ चल नहीं पा रहे हैं। उन्होने ऐसे व्यापारियों ( खुदरा व्यापारी और दुकानदार ) का ध्यान रखने की वकालत करते हुए कहा कि ऐसे लोगों को पिछड़ने से कैसे रोका जाए, इसका ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है।

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वैष्णव ने कहा कि कंटेट की जिम्मेदारी, समावेशी विकास , जलवायु परिवर्तन का ध्यान, सामाजिक प्रभाव के साथ-साथ इंटरनेट के भविष्य से जुड़ा पांचवा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा साइबर सुरक्षा का भी है। उन्होने कहा कि इंटरनेट के विस्तार के साथ ही साइबर अपराध भी बढ़ते जा रहे हैं और ऐसे में इटरनेट के भविष्य को लेकर कोई भी नीति बनाते समय साइबर अपराध पर लगाम लगाने के तरीकों पर भी खास फोकस करना होगा, बल्कि इसे इंटरनेट विकास का कोर पार्ट बनाना होगा।

कार्यक्रम में बोलते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने दावा किया कि 2014 के बाद तकनीक और आईटी का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को खत्म करने , पारदर्शिता को बढ़ाने और लोगों की मदद करने के लिए किया गया। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के निर्देशन में 2014 के बाद सूचना तकनीक और प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से लोगों को मिलने वाली सुविधाएं बढ़ी है, उनका जीवन आसान हुआ है।

राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि आने वाले कुछ सालों में एक बिलियन से ज्यादा भारतीय इंटरनेट से कनेक्ट होंगे और ज्यादा से ज्यादा ऑनलाइन होंगे और ऐसे हालात में भविष्य में इंटरनेट के इस्तेमाल की नीति को सावधानी के साथ बनाना होगा। इंटरनेट सुविधा की क्वालिटी, उपलब्धता , इस्तेमाल और ऑनलाइन क्राइम सहित हमें सभी पहलुओं पर सोचना होगा।

इंटरनेट पर नियंत्रण को लेकर मोदी सरकार की नीति के बारे में बताते हुए केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने दावा किया कि हमारी सरकार का यह स्पष्ट मानना है कि कि इंटरनेट को सरकारी नियंत्रण से और टेलीकॉम कंपनियों सहित अन्य बड़ी-बड़ी कंपनियों के प्रभाव से मुक्त होना चाहिए। उन्होने यह दावा भी किया कि दुनिया में इंटरनेट के विस्तार में भी आने वाले दिनों में भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

--आईएएनएस

एसटीपी/आरजेएस