उत्तरकाशी – श्रद्वालुओं का इंतजार हुआ खत्म, इस दिन खुलेंगे यमुनोत्री धाम के कपाट, जानें शुभ मुहूर्त

347
Facebooktwittergoogle_pluspinterest

उत्तरकाशी- न्यूज टुडे नेटवर्क: उत्तराखंड की देवभूमि में स्थित पवित्र धामों के दर्शनों के लिए विश्वभर से श्रद्धालु साल भर जुटते हैं। ऐसे में धामों के कपाट बन्द होने के चलते श्रद्धालु अपने ईष्ट के दर्शनों से वंचित रह जाते हैं। यमुनोत्री धाम पर आकर अपनी आत्मशान्ति और मुरादों से झोली भरने की ख्वाहिश पाले श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी है।शुक्रवार को खरसाली में प्रात: तीर्थ पुरोहितों द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना के साथ कपाट खुलने का मुहुर्त तय किया गया है। यमुनोत्री मंदिर समिति के उपाध्यक्ष जगमोहन उनियाल ने बताया कि 18 अप्रैल को 9.00 बजे यमुना माता की डोली शीतकालीन पड़ाव खरसाली से रवाना होगी। बता दें कि शीतकाली पड़ाव में यमुना माता की डोली शीतकालीन पड़ाव खरसाली में स्थापित हो जाती है। 

18 अप्रैल को ठीक 12.15 बजे सिद्ध योग और अभिजीत मुहूर्त में यमुनोत्री मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। वहीं गंगोत्री धाम के कपाट भी 18 अप्रैल को 1.15 बजे को खुलने हैं। 18 अप्रैल को अक्षय तृतीय का पर्व है। कपाट खुलने का मुहुर्त तय होने के साथ ही यात्रा को लेकर तैयारियां भी जोरों पर शुरू हो गई है। इस अवसर पर मंदिर समिति के सचिव कीर्तेश्वर उनियाल, श्याम सुंदर उनियाल, भागेश्वर उनियाल, सुनील उनियाल, पूर्व उपाध्यक्ष पवन उनियाल सहित कई पुरोहित मौजूद रहे।

यमुनोत्री धाम

चार धाम यात्रा का पहला पड़ाव है यमुनोत्री धाम 

चार धामों में से एक यमुनोत्री धाम से यमुना का उद्गम मात्र 1 किमी की दूरी पर है। यहां बंदरपूंछ चोटी (6315 मी) के पश्चिमी अंत में फैले यमुनोत्री ग्लेशियर को देखना श्रद्धालुओं के लिए काफी रोमांचक अनुभव होता है। गढ़वाल हिमालय की पश्चिम दिशा में उत्तरकाशी जिले में स्थित यमुनोत्री चार धाम यात्रा का पहला पड़ाव है।


यमुना पावन नदी का स्रोत कांलिदी नदी है। तीर्थ स्थल से 1 कि. मी. दूर यह स्थल 4421 मी. ऊँचाई पर स्थित है। दुर्गम चढ़ाई होने के कारण श्रद्धालु इस उद्गम स्थल को देखने से वंचित रह जाते हैं। यमुनोत्री का मुख्य मंदिर यमुना देवी को समर्पित है। पानी के मुख्य स्रोतों में से एक सूर्यकुण्ड है जो गरम पानी का स्रोत है।