Women’s Day Special: निर्धन बेटियों को ‘निशुल्क शिक्षा’ देता है उत्तराखंड़ का ये स्कूल, बेटियों को लेकर मां-बाप रहते हैं टेंशन फ्री, देखें VIDEO

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देहरादून- न्यूज टुडे नेटवर्क: आज अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस है। हर तरफ महिलाओं की तारीफों के पुल बांधे जा रहे हैं। लेकिन क्या आपको नही लगता जो सम्मान महिलाओं और उनकी उपलब्धियों के लिए इस दिन झलकता है , उसे साल के हर दिन हर पल मिलना चाहिए। लेकिन अफसोस यह हो नही पाता । लेकिन हमारे ही समाज में कुछ ऐसी भी महिलाएं हैं जो दिन रात इसी कोशिश में लगी रहती हैं कि कैसे बेटियों के जीवन में उजाला लाया जाये, और कैसे उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर सशक्त किया जाये।

श्री तारा मां

VIDEO में देखें: क्यों है श्री तारा मां का ये स्कूल बेहद खास –

आज हम आपको एक ऐसी ही भागीरथ प्रयास से रूबरू करवाने जा रहे हैं। बेटियों की तरक्की की भावना के साथ श्रीतारा मां ने साल 2012 में देहरादून जिले के रायवाला स्थित हरिपुरकलां गांव में ऐसे संस्थान की नींव रखी, जिसके जरिये उन सैकड़ों बेटियों को निशुल्क शिक्षा दी जा रही है, जो बेहद गरीब परिवारों से हैं। श्री तारा मां की सेवा भावना को देखते हुए लोग उन्हें ‘माताजी’ नाम से पुकारते हैं।

बेटियों की बुनियाद होती हैं यहाँ मजबूत

पहली से आठवीं कक्षा तक संचालित श्री मां कन्या विद्यालय में हर वह लड़की प्रवेश पा सकती है, जिसके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है। वर्तमान में यहां 120 बेटियां मुफ्त शिक्षा पा रही हैं। इन बच्चों को ड्रेस, कापी-किताब आदि विद्यालय की ओर से ही मुहैया कराए जाते हैं। यहां पढ़ने वाली कन्याओं के लिए सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि आज के तकनीकी युग के मुताबिक आधुनिक कंप्यूटर लैब भी उपलब्ध है। यहां इनको आधुनिक कंप्यूटर ज्ञान के साथ सूचना तकनीकी, इंटरनेट आदि का ज्ञान भी कराया जाता है।

बता दें कि इस बेटियों के लिए समर्पित इस स्कूल में खेलकूद व मनोरंजन के भी भरपूर इंतजाम हैं। सुबह ध्यान, साधना, योग व प्रार्थना के बाद बेटियाँ दिन भर पढाई में व्यस्त रहती हैं। इंडोर गेम के साथ, कंप्यूटर लैब, टीवी व समाचार पत्र की सुविधा भी विद्यालय में है। संगीत प्रशिक्षक विनोद कौशिक के निर्देशन में यह बच्चे गीत-संगीत में भी पारंगत हो रहे हैं।

दिव्यांग बच्चों का ‘स्नेहदीप’

केदारघाटी की आपदा से प्रभावित दस बेटियां भी श्रीतारा मां के सानिध्य में भागीरथी धाम में जीवनयापन और शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। संस्थान से जुड़ी मंजू तेजवानी ने बताया कि श्रीतारा मां की प्रेरणा से ठाणे (महाराष्ट्र) में भी दिव्यांग बच्चों के लिए पहली से दसवीं कक्षा तक ‘स्नेहदीप’ नाम से विद्यालय संचालित हो रहा है। यहां 350 बच्चे अध्ययनरत हैं।

श्री मां कन्या विद्यालय हरिपुरकलां की प्रिंसीपल पुष्पा कोटवानी के कहती हैं कि बच्चे संस्कारित बनें, इसके लिए उन्हें आध्यात्मिक वातावरण प्रदान किया जाता है। तारा मां की प्रेरणा से कन्या संरक्षण और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की दिशा में भी कार्य हो रहा है। यही वजह है कि श्री मां कन्या विद्यालय हरिपुरकलां आज समाज के लिए नजीर बना हुआ है। उम्मीद यही की जानी चाहिए कि इस विद्यालय की उन्नत शिक्षा का लाभ लेकर समाज में बेटियों को वो दर्जा हासिल हो सके जिसकी वे वाजिब हकदार हैं।

‘न्यूज टुडे नेटवर्क’ की ओर से मातृशक्ति को अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं….