चंपावत- (वीडियो) यू-ट्यूब पर छाई उत्तराखंड की ढिंचक पहाड़ी आमा, टेलेंट देख आप भी रह जाओगें दंग

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चंपावतन्यूज टुडे नेटवर्क (जीवन राज) चंपावत जिले के लोहाघाट के ग्राम बरमतोड़ा की रहने वाली आमा इन दिनों अपने टेलेंट के दम पर पूरी दुनियां भर में धूम मचा रही है। 70 वर्षीय आमा ने अपना हर तरह का टेलेंट दिखाया है। पहाड़ी गानों से लेकर हिन्दी गानों तक खूब जमकर अपने डांस के जलवे बिखेरें है। इसके अलावा फराटेदार पहाड़ी और हिन्दी बोलने में पहाड़ी आमा परफेक्ट है। उनके पूरे परिवार ने यू्-ट्यूब पर कॉमेडी, पहाड़ी गानों को नये रूप में रंग अैर ढंग के साथ प्रस्तुत कर पहाड़ की विलुप्त होती संस्कृति को बचाने के वीडियो भी बनाये है। गुरुवार को माता जी का नया वीडियो अपने यू-ट्यूब चैनल सुपर फार्ट वीडियोस पर डाला गया है। ढिंचक माताजी हूं मैं ढिंचक माता जी ने जबरदस्त धमाल मचा रखा है। 70 वर्ष की उम्र में लोहाघाट की आमा का टेलेंट देख लोग दांतू तले ऊंगली दबाने पर मजबूर हो जायेंगे

कौन है ढिंचक आमा

पहाड़ी आमा को देशभर के लोग ढिंचक आमा के नाम से जानते है। पहाड़ी आमा का नाम बची देवी है जो लोहाघाट की रहने वाली है। उनके पति कुंवर राम भी उनका भरपूर सहयोग करते है। जो एयरपोर्ट ऑथोरिटी ऑफ इंडिया से रिटायर्ड है। इसके अलावा उनके बड़े पुत्र सुभाष चंद करीब 15 सालों से हिन्दी फिल्म्स और सीरियल में सक्रिय है। ढिंचक आमा का पूरा परिवार फिल्म प्रोडक्शन से जुड़ा है। बड़ा लडक़ा कंपोजर, म्यूजिक अरेंजर, लेखक और डायरेक्टर है। छोटा लडक़ा एडिटर और सिनेमेटोग्राफर है। साथ ही बहू भी अभिनय करती है। कभी ढिंचक आमा कुमाऊंनी डे्रस में फॉग गाते हुई दिखती है तो अगले वीडियो में आमा जीन्स और लैदर की जैकेट पहनकर रॉक स्टार की तरह हिंदी गाने गाती है।

कैसे पूरा हुआ लोहाघाट से मुबंई तक का सफर

फोन पर न्यूज टुडे नेटवर्क से बातचीत में उनके बेटे सुभाष ने बताया उनके पिता दिल्ली में जॉब करते थे। तब उनका परिवार भी दिल्ली आ गया। यही से सुभाष की पढ़ाई हुई। इसके बाद सुभाष जाँब की तलाश में मायानगरी मुबंई पहुंचे। जहां उन्होंने काम शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने खुद ही वीडियो बनाने शुरू किये। इसके बाद वह लोहाघाट के लच्छू प्रसाद के नाम से यू-ट्यूब पर छा गये। उनके इस काम में उनका बखूबी साथ दे रही उनकी पत्नी। उन्होंने भी यू-ट्यूब पर अपनी वीडियो के दम पर धमाल मचा रखा है। पहाड़ के इस छोरे का नाम आज हर किसी की जुबां पर चढ़ गया है। सुभाष ने बताया कि पहाड़ की संस्कृति से उनका बेहद लगाव है। इसलिए उन्होंने बालीवुड का गढ़ कहे जाने वाले मुबंई जैसे शहर में हिन्दी फिल्मों में कदम न रखकर उत्तराखंड की संस्कृति को संवारने की सोची। वह उत्तराखंड को एक फिल्म इंडस्ट्री के रूप में विकसित करना चाहते है। लेकिन उन्हें इसके लिए सहयोग की भी आवश्यकता है। हर क्षेत्रीय भाषा का एक सिनेमा है। अभिनय के साथ वह पूरे वीडियो में चार चांद लगाने का काम व अपने खर्चे पर कर रहे है।

मायानगरी में चला लोहाघाट का जादू

लोहाघाट में लच्छू प्रसाद के नाम से प्रसिद्ध सुभाष की कॉमेडी वीडियो से यू-ट्यूब भरा पड़ा है। उन्होंने हर तरह की पहाड़ी वीडियो को कॉमेडी के साथ एक नये अंदाज में पेश किया है। इसके अलावा अपनी पत्नी के साथ मिलकर उत्तराखंडी का इंटरव्यू, पहाड़ी भेलपुरी, पहाड़ी करवचौथ आपको हंसते-हंसते लोटपोट कर देगी। साथ ही लच्छू प्रसाद एंड प्रिया प्रकाश, दारू का असर पहाड़ी कॉमेडी, लच्छू प्रसाद का रांग नंबर, लच्छू प्रसाद की दारूयादिली, लच्छू पटवारी का खेलूना, बिष्ट जी के दस्त और व्यंग बिष्ट जी जैसे कई कॉमेडी वीडियो से सुभाष का हरी खुरसानी एंटरटेनमेंट चैनल भरा पड़ा है। वह काफी लंबे समय से इस क्षेत्र में लगे है।