वाराणसी : इन पुरुषों ने अपनी ‘जिंदा’ पत्नियों का कर डाला अंतिम संस्कार, वजह हैरान करने वाली…

37
Facebooktwittergoogle_pluspinterest

वाराणसी- न्यूज टुडे नेटवर्क। वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर एक विचित्र नजारा देखने को मिला। यहां एक साथ करीब 160 पुरुषों ने अपनी जीवित पत्नियों का अंतिम संस्कार किया। इन सभी की पत्नियां जीवित है और इन्हें छोड़ चुकी हैं। इससे पहले भी लोग बड़ी संख्या में ऐसा कर चुके हैं। दरअसल, ये लोग अपनी पत्नियों के उत्पीडऩ से परेशान थे। इतनी ही नहीं इन्होंने नारीवाद की बुराइयों का सामना करने के लिए वाराणसी के घाटों पर तांत्रिक पूजा भी कराई।

varansi-11

देश के अलग-अलग हिस्सों से आए ये लोग…

देश के अलग-अलग हिस्सों से आए और सेव इंडिया फेमिली फाउंडेशन (एसआईएफएफ) एनजीओ से जुड़े लोगों ने अपनी पूर्व पत्नियों के ‘पिंड दान’, ‘श्राद्ध’ आदि की रस्में गंगा के तट पर किया। उन्होंने कहा कि शादी की बुरी यादों से छुटकारा पाने के लिए भी वे ऐसा कर रहे हैं।

…ताकि बुरी यादों से मिल सके मुुक्ति

ये पत्नी पीडि़त पति एनजीओ सेव इंडिया फैमिली फाउंडेशन से जुड़े हुए हैं। इन लोगों ने वाराणसी में गंगा घाट पर पिंड दान और श्राद्ध किया है ताकि उन्हें असफल शादी की बुरी यादों से मुक्ति मिल सके। इन लोगों ने तांत्रिक रस्म पिशाचिनी पूजा भी की। मुंबई के रहने वाले और सेव इंडिया फैमिली तथा वास्तव फाउंडेशन के अध्यक्ष अमित देशपांडे टीओआई से कहा कि यह पूजा इसलिए कराई जाती है ताकि पति शादी की बुरी यादों से मुक्त हो सकें।

varansi-4

जब लोगों ने बीजेपी सांसद का उड़ाया था मजाक

बता दें कि लोकसभा में बीजेपी सांसद हरिनारायण राजभर ने जब उत्पीडि़त पतियों के लिए एक आयोग बनाने की बात कही थी तब वहां मौजूद सभी लोगों ने उनका मजाक उड़ाया था लेकिन इस संस्था से जुड़े लोग उनका समर्थन करते हैं। एसआईएफएफ के संस्थापक राजेश वखारिया कहते हैं- कहा जाता है कि भारत एक पितृसत्तात्मक सोसायटी है,लेकिन पतियों के अधिकारों को सुरक्षा देने के लिए कोई कानून नहीं है। दहेज विरोधी कानून का दुरुपयोग हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘उत्पीडऩ के शिकार पतियों की मुख्य शिकायत भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए को लेकर है। इस धारा के जरिए पतियों को प्रताडि़त किया जाता है।’