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विश्व महिला दिवस पर सोशल मीडिया में छाया रहा पुरुष अधिकारों का मुद्दा

न्यूूज टुडे नेटवर्क। सोमवार को देश भर में महिला दिवस मनाया जा रहा है वही दूसरी तरफ आज सोशल मीडिया पर मेंस कमीशन की मांग का विषय काफी चर्चा में है जिसमें महिलाओं के द्वारा किए गए अपराधों को दर्शाया गया है।एक तरफ जहां महिला भारतीय संस्कृति परिवार को बनाए रखने तथा संस्कारों के साथ
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विश्व महिला दिवस पर सोशल मीडिया में छाया रहा पुरुष अधिकारों का मुद्दा

न्यूूज टुडे नेटवर्क। सोमवार को देश भर में महिला दिवस मनाया जा रहा है वही दूसरी तरफ आज सोशल मीडिया पर मेंस कमीशन की मांग का विषय काफी चर्चा में है जिसमें महिलाओं के द्वारा किए गए अपराधों को दर्शाया गया है।एक तरफ जहां महिला भारतीय संस्कृति परिवार को बनाए रखने तथा संस्कारों के साथ जीवन जीने की कला सिखाती है तो वहीं दूसरी ओर देश की कानून व्यवस्था कुछ ऐसी स्थिति में है जहां यही परिवारों के विघटन का कारण बनी हुई है। देश भर में दहेज और बलात्कार जैसे तमाम झूठे मुकदमे दर्ज किए जाते हैं जिसमें से 98 परसेंट से ज्यादा मुकदमे झूठे होते हैं कॉपी पेस्ट होते हैं। केवल वर पक्ष पर दबाव बनाने के लिए अपना मनमाना उद्देश्य हासिल करने के लिए महिलाओं द्वारा झूठे मुकदमे दर्ज कराए जाते हैं।जिसमें पुरुषों का पूरा परिवार ही फंसा दिया जाता है और लाखों रुपए एलुमनी के वसूल कर के मुकदमे वापस ले लिए जाते हैं।

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इन्हीं अपराधों को मद्देनजर रखते हुए देश के तमाम पुरुषों ने देश में समान कानून की मांग एनसीडब्ल्यू तथा पीएम नरेंद्र मोदी को टैग करके की है।नदी, नाले, पशु, पक्षी, पहाड़ और जंगल तक के लिए विभिन्न मंत्रालय हैं वहीं पुरुषों के लिए कोई मंत्रालय कोई हेल्प डेस्क नहीं बनाया गया है ।50 से अधिक कानून महिलाओं की सुरक्षा में बनाए गए हैं किंतु एक भी ऐसा कानून नहीं है जहां पुरुषों को भी सुरक्षा मिल सके। ऐसे झूठे मुकदमों से निर्दोष पुरुष अपने परिवार पर मुकदमे होते ही आत्महत्या तक कर लेते हैं। इन केसों की कोई सुनवाई नहीं होती ना ही किसी तरह की गिरफ्तारी होती है। मुकदमे चाहे झूठे हूं या सच्चे यह कानून पुरुषों की सुनता ही नहीं है।हस्बैंड वेलफेयर ग्रुप पीलीभीत के नेशनल कोआर्डिनेटर वरुण सक्सेना ने कहा कि “जब तक देश में मैंस कमीशन नहीं होगा मैंस डेस्क नहीं होगी तब तक पुरुषों का ऐसे ही शोषण होता रहेगा”।