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बरेली: इस बार विशेष शिव योग में मनेगा महाशिवरात्रि पर्व, जानिये पूजा का समय और विधि

न्यूज टुडे नेटवर्क, बरेली। देवाधिदेव महादेव की भक्ति के सबसे बड़े पर्व महाशिवरात्रि के लिये शहर भर के मंदिरों को सजाया जा रहा है। महाशिवरात्रि के महापर्व को लेकर शहर के विभिन्न मंदिरों में तैयारियां आरंभ हो गई हैं। शिव मंदिरों में इस पर्व को बहुत ही भक्तिभाव से मनाया जाता है। इस वर्ष शिवरात्रि
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बरेली: इस बार विशेष शिव योग में मनेगा महाशिवरात्रि पर्व, जानिये पूजा का समय और विधि

न्‍यूज टुडे नेटवर्क, बरेली। देवाधिदेव महादेव की भक्ति के सबसे बड़े पर्व महाशिवरात्रि के लिये शहर भर के मंदिरों को सजाया जा रहा है। महाशिवरात्रि के महापर्व को लेकर शहर के विभिन्‍न मंदिरों में तैयारियां आरंभ हो गई हैं। शिव मंदिरों में इस पर्व को बहुत ही भक्तिभाव से मनाया जाता है। इस वर्ष शिवरात्रि के पर्व पर विशेष मुहूर्त बन रहा है। इस मुहूर्त में पूजा करने से इस पर्व के फल में वृद्धि होती है। ज्‍योतिषाचार्यो के अनुसार व्रत-उपवास रखकर भगवान शिव को आसानी से प्रसन्‍न किया जा सकता है। इस दिन भगवान शिव के हर रूप की पूजा होती है। प्रसन्‍न होकर भोलेनाथ‍ भक्‍तों की हर मनोकामना को पूरा करते है। शिवभक्त इस महापर्व का वर्षभर इंतजार करते हैं। बरेली में मुख्‍य रूप से बाबा अलखनाथ, बाबा धोपेश्‍वरनाथ, बाबा त्रिवटीनाथ, बाबा वनखण्‍डीनाथ मंदिरों में भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्‍ता इंतजाम किये गये है।

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पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि का पर्व 11 मार्च को फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी की तिथि को मनाया जाएगा। इस दिन चंद्रमा मकर राशि और सूर्य कुंभ राशि में होंगे। महाशिवरात्रि का पर्व शिव योग में मनाया जाएगा। इस दिन अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 08 मिनट से 12 बजकर 55 तक रहेगा।

शिवरात्रि की महिमा अपार

भगवान शिव को प्रसन्‍न करने के लिये खोया, मिठाई जैसी वस्‍तुओं की आवश्‍यक्‍ता नहीं होती है। बेलपत्र, धतूरा और एक लोटा जल से ही वह खुश हो जाते है। शिव महापुराण में भगवान शिव को नीलकंठ कहा गया है। ऐसा इसलिये कहा गया है क्‍योंकि समुद्र मंथन के समय भगवान शिव ने विष पीकर सारी श्रृष्टि का तबाह होने से बचाया था। उन्‍होनें विष को कंठ से नीचे नहीं उतरने दिया, इस कारण वह अचेत हो गये। विष की गर्मी को दूर करने के लिये देवताओं ने भगवान शिव के सिर पर धतूरा, भांग रखकर लगातार जलाभिषेक किया जिससे शिव जी के विष का असर खत्‍म हो गया।

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इसी मान्‍यता के अनुसार भगवान शिव को भांग, धतूरा और जल चढाया जाने लगा। शास्‍त्रों में बेल के तीन पत्‍तों को रज, सत्‍व और तमोगुण के साथ ब्रह्मा, विष्‍णु और महेश का भी प्रतीक माना गया है। दूध को धर्म और मन पर प्रभाव की दृष्टि से सात्विक समझा जाता है। इसमें गाय का दूध सर्वाधिक पवित्र माना जाता है। शिवलिंग पर दूध से रूद्राभिषेक करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। सोमवार के दिन शिवलिंग पर दूध चढ़ाने से चन्‍द्रमा मजबूत होता है।

महाशिवरात्रि पर ऐसे करें पूजा

महाशिवरात्रि पर प्रात: स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजा आरंभ करें। शिवरात्रि के व्रत में नियमों का कठोरता से पालन करना चाहिए तभी इसका पूर्ण फल प्राप्त होता है। इसके साथ ही महाशिवरात्रि के व्रत का पारण भी विधि पूर्वक करना चाहिए। सूर्योदय और चतुर्दशी तिथि के अस्त होने के मध्य समय में ही व्रत पारण करना चाहिए।

4 प्रहर के पूजन का है विशेष महत्‍व

महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा चार बार की जाती है। मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान की पूजा रात्रि के समय एक बार या फिर संभव हो तो चार बार करनी चाहिए। वेदों में रात्रि के चार प्रहर बताए गए हैं। इस दिन हर प्रहर में भगवान शिव पूजा की जाती है। 11 मार्च को प्रात: 12 बजकर 06 मिनट से प्रात: 12 बजकर 55 मिनट तक. निशिता काल की अवधि: 00 घण्टे 48 मिनट।