देवभूमि में आज भी मौजूद है “अर्जुन की कुर्सी” चले आइये सहस्रताल पर्यटक स्थल

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उत्तराखंड। टिहरी भारत के उत्तराखण्ड राज्य का एक जिला है. पर्वतों के बीच स्थित यह स्थान बहुत सुंदर हैं. प्रति वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक यहां घूमने के लिए आते हैं. यह स्थान धार्मिक स्थल के रूप में भी काफी प्रसिद्ध है. यहां आप चम्बा, बुदा केदार मंदिर, कैम्पटी फॉल, देवप्रयाग आदि स्थानों में घूम सकते हैं. यहां की प्राकृतिक खूबसूरती काफी संख्या में पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है.

Arjunas Chair

लेकिन कुछ पर्यटन स्थल ऐसे हैं जिसकी लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है. इन्हीं पर्यटक स्थलों में एक है सहस्रताल पर्यटक स्थल के बीच का एक स्थान जिसे “अर्जुन की कुर्सी” के नाम से जाना जाता है.

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अर्जुन की कुर्सी जो आकर्षण का केंद्र बनती हैं, वहीं विभिन्न प्रकार के पुष्प भी मन को बहुत लुभाते हैं. आस-पास स्थित बर्फीली पहाडिय़ों का नजारा भी देखने को मिलता हैं. सड़क से काफी दूर होने के कारण यहां तक पहुंचने में काफी समय लगता है.

उत्तराखंड की प्रकृति का यदि वास्तविक आनंद उठाना है तो अर्जुन की कुर्सी से बेहतर जगह कोई नहीं है. जिले के प्रमुख पर्यटक स्थल सहस्रताल से यह स्थान करीब आठ किलोमीटर पहले पड़ता है. सहस्रताल से तो सभी पर्यटक वाकिफ हैं, लेकिन अर्जुन की कुर्सी के बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है.

यह स्थान सहस्रताल का मुख्य पड़ाव है. इसलिए पर्यटक कुछ समय के लिए यहां पर रुक कर प्रकृति का आनंद लेते हैं. इस स्थान पर एक बड़ी पत्थर की शिला है, जो कुर्सी जैसी है. यह कुर्सी अर्जुन की कुर्सी के नाम से जानी जाती है. क्षेत्र के लोग कुर्सी की पूजा-अर्चना कर यहां पर पुष्प चढ़ाते हैं.

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बूढ़ाकेदार और अर्जुन की कुर्सी

बताते हैं कि पांडव जब स्वर्गारोहण के लिए निकले तो सबसे पहले वह बूढ़ाकेदार में रुके, जहां भगवान शिव ने उन्हें वृद्ध के रूप में दर्शन किए. जिस कारण इस स्थान का नाम बूढ़ाकेदार पड़ा. इसके बाद कुछ दूर जाकर एक स्थान पर पांडवों ने विश्राम किया. अर्जुन एक पत्थर की शिला पर बैठे और इसी शिला को लोग अर्जुन की कुर्सी के नाम से जानते हैं और उसकी पूजा करते हैं.

हिमालयन ट्रैकिंग एवं माउंटेनियरिंग के अध्यक्ष शिव सिंह नेगी के मुताबिक पर्यटक स्थलों की जानकारी और रुटों को दर्शाने वाले बोर्ड विभिन्न स्थानों पर लगाए जाने चाहिए, ताकि पर्यटकों को दिक्कत न हो. साथ ही पैदल मार्ग भी सही होने चाहिए.