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देहरादून- ईमानदार नेतृत्व के रूप में बनी सीएम त्रिवेंद्र की छवि, केन्द्र से इन कार्यों की मंजूरी संग लौटे देवभूमि

अब जबकि कि उत्तराखंड में त्रिवेंद्र सरकार को चार साल पूरे होने जा रहे है, ऐसे में अब सरकार के कार्यो का आंकलन भी किया जाने लगा है। इन चार सालों में सीएम त्रिवेंद्र की छवि एक ईमानदार नेतृत्व देने वाले नेता के रूप में हुई है। साथ ही डबल इंजन सरकार का असर भी
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देहरादून- ईमानदार नेतृत्व के रूप में बनी सीएम त्रिवेंद्र की छवि, केन्द्र से इन कार्यों की मंजूरी संग लौटे देवभूमि

अब जबकि कि उत्तराखंड में त्रिवेंद्र सरकार को चार साल पूरे होने जा रहे है, ऐसे में अब सरकार के कार्यो का आंकलन भी किया जाने लगा है। इन चार सालों में सीएम त्रिवेंद्र की छवि एक ईमानदार नेतृत्व देने वाले नेता के रूप में हुई है। साथ ही डबल इंजन सरकार का असर भी दिखने लगा है। केंद्र से भी राज्य को पूरा सहयोग मिल रहा है।

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अभी हाल ही में सीएम त्रिवेंद्र का दिल्ली दौरा काफी चर्चा में रहा है, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ ही तमाम केन्द्रीय मंत्रियों से मुलाकातें कीं। संभवतया किसी प्रदेश के वह पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने एक संक्षिप्त दिल्ली के दौरे में 6 केन्द्रीय मंत्रियों से न सिर्फ सिलसिलेवार भेंट की, बल्कि वह उनसे उत्तराखण्ड के लिए कुछ न कुछ सौगात भी ले आये। हर एक राजनेता ने सीएम त्रिवेन्द्र का दिल खोलकर स्वागत किया।

इनसे की मुलाकात

माननीय केंद्रीय नागरिक उड्डयन और शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय रेल तथा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, से होते हुय मंत्रियों से मुलाकात का यह सिलिसला रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से भेंट पर खत्म हुआ।

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नये प्रस्तावों पर हुई चर्चा

मंत्रियों से मुलाकात के दौरान उनके विभागों से सम्बंधित योजनाओं और नए प्रस्तावों पर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि केन्द्र की योजनाओं की उत्तराखण्ड में धरातल पर क्या स्थिति है और राज्य की अगली जरूरतें क्या हैं। केन्द्रीय मंत्रियों ने भी मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र को खाली हाथ नहीं लौटाया।

इन कार्यों को मिली मंजूरी

भारत सरकार की ओर से उत्तराखंड में भारत नेट 2.0 प्रोजेक्ट को शुरू करने की स्वीकृति प्रदान करना, चारधाम क्षेत्र की डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने पर सहमति, उड़ान योजना में देहरादून-पिथौरागढ़-हिण्डन मार्ग और सहस्त्रधारा-चिन्यालीसौड़-गौचर मार्ग पर हवाई सेवाएं नियमित करने के लिए दोबारा टेंडर की अनुमति, जल जीवन मिशन में उत्तराखंड के सभी बड़े और छोटे शहरों को

शामिल किए जाने की स्वीकृति, पंतनगर ग्रीन फील्ड हवाई अड्डे को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का बनाए जाने पर सहमति, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-हर खेत को पानी के अंतर्गत उत्तराखंड में लगभग ₹350 करोड़ की 422 नई योजनाओं और 06 सीवेज शोधन संयंत्र और सीवर लाइन (लगभग ₹229 करोड़) के प्रस्ताव सहित कई मामलों में मंजूरी, वित्तीय वर्ष 2020-21 में केंद्रीय सड़क व अवस्थापना निधि

के अंतर्गत मंत्रालय को प्रेषित ₹219 करोड़ के प्रस्तावों और अन्य मामलों की शीघ्र स्वीकृति का आश्वासन, आईएसबीटी, देहरादून बस अड्डा की सडक परियोजना के लिए ₹48 करोड और रूद्रप्रयाग टनल निर्माण के लिए लगभग ₹225 करोड़ की स्वीकृति लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र देहरादून लौट आए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी उनकी तसल्ली से गुफ्तगू हुई।

भेंट किये उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पाद

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने प्रधानमंत्री से लेकर मंत्रियों को उपहार के रूप में उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पाद भेंट कर उनकी जबरदस्त ब्रांडिंग की। उनका दो दिन का दिल्ली प्रवास बहुत से लोगों की उस ग़लत धारणा को हमेशा-हमेशा के लिए दूर कर गया जो यह मानते रहे कि ‘त्रिवेन्द्र सरकार 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर भी पाएगी या नहीं’।

पीएम मोदी से की मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से शिष्टाचार भेंट हुई। प्रधानमंत्री को चमोली जिले के जोशीमठ क्षेत्र में आई आपदा से हुई जनधन की हानि और इसके बाद संचालित सर्च व रेस्क्यू आपरेशन के साथ ही राहत कार्यों के बारे में जानकारी दी। राज्य में उत्तराखण्ड हिमनद एवं जल संसाधन केंद्र बनाए जाने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री को कुम्भ मेले के साथ ही बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्यों की भी विस्तार से जानकारी दी।

राज्यों के वित्तीय संसाधनों से अवगत कराते हुए वन भूमि हस्तान्तरण के मामलों में राज्य सरकार की परियेाजनाओं को केंद्र सरकार की परियोजनाओं की भांति डिग्रेडेड फोरेस्ट पर क्षतिपूरक वृक्षारोपण किए जाने की नीति की आवश्यकता पर बल दिया। वही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की माने तो देश की सीमाओं की रक्षा में उत्तराखण्ड के जवानों का हमेशा बड़ा योगदान रहा है। केंद्र द्वारा उत्तराखण्ड को हर सम्भव सहयोग दिया जा रहा है।