उत्तराखंड के वैज्ञानिकों ने डायनासोर के जमाने का यह अद्भुत पौधा खोजा, अब होगा चमत्कार

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हल्द्वानी[न्यूज टुडे नेटवर्क](चयन राजपूतडायनासोर. ये शब्द सुनकर ही दिमाग भन्ना जाता है. हमने तो अभी तक डायनासोर सिर्फ मूविज में देखे हैं भई. लेकिन हमारे उत्तराखंड के वैज्ञानिकों ने एक कमाल कर दिखाया है. डायनासोर काल से जुड़ा एक बहुत ही महत्वपूर्ण काम कर दिखाया है. उत्तराखंड वानिकी शोध शाखा रानीखेत के वैज्ञानिकों ने दुनिया के करीब 270 मिलियन साल पुराने पौधे जिंको बाइलोवा की प्रजाति के क्लोन उगाने में कामयाबी हासिल की है.

डायनासोर काल से जुड़े जिंको बाइलोवा पौधे की खास बात क्या है ?

हां वो ही बता रहा हूं. डायनासोर काल से धरती पर पाए जाने वाले इस चीनी मूल के पौधे की खास बात ये है कि इसमें सर्वधिक औषधीय गुण पाए जाते हैं. उत्तराखंड के वैज्ञानिकों ने क्लोनिंग के जरिए वानिकी शोध शाखा की नर्सरी में पहली बार जिंको बायलोवा के 151 पौधे तैयार किए गए हैं. किसी-किसी पौधे की तो ऊंचाई 2 मी. तक हो चुकी है.

उत्तराखंड के वैज्ञानिकों ने कैसे तैयार किया होगा इस पौधे का क्लोन

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वन संरक्षक अनुसंधान संजीव चतुर्वेदी ने बताया कि अल्मोड़ा के कटारमल पर्यारण शोध संस्थान और कश्मीर से जिंको बायलोवा प्रजाति के कुछ जेनेटिक सैंपल लिए गए. विस्तृत अध्ययन के बाद रानीखेल स्थित कालीगाढ़ शोध नर्सरी में इनके क्लोन तैयार किए गए.

अगर ये डायनासोर काल का पौधा है तो इसकी कुछ खासबात तो होगी.

जिंको बायलोवा की खासबात ये है कि ये पौधा नर और मादा होता है. मतलब पौधे में भी मेल और फिमेल होते हैं. नर की पत्तियों के बीच कटाव कम गहरा होता है. मादा पौधों पर फूल जल्द आते हैं, जबकि नर पौधे में 4 महीने बितने के बाद फूल आते हैं. करीब 20 साल बाद ही इसके वृक्ष में फूल आते हैं. यह वृक्ष समुद्र तल से 2 हजार मीटर की ऊंचाई पर ही उगता है. यह 30 मी. तक ऊंचा हो सकता है.

एक हजार साल जिंदा रहने का रिकॉर्ड

जिंको वायलोवा को जिंदा जीवाश्म भी कहा जाता है. जिंकोगेशिया परिवार की यह एकमात्र जीवित बची वृक्ष प्रजाति है. चीन में इस पेड़ की अधिकतम उम्र एक हजार साल रिकॉर्ड हुई है.

इन रोगों में रामबाण है जिंको बायलोवा

शोध साबित करते हैं कि जिंको बायलोवा अल्जाइमर्स, ग्लूकोमा, दमा, एलर्जी, नपुंसकता आदि रोगों में बेहद कारगर है. कई दवाओं में ऊर्जा बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होने वाला जिंगसिंग तत्व इससे ही मिलता है.

चीन में पारंपरिक दवाओं में प्रयोग

जिंको बायलोवा का प्रयोग चीन की पारंपरिक दवाओं में सदियों से होता रहा है. दुनिया भर में चीन से इसकी पत्तियों का निर्यात किया जाता है. इनसे 42 से अधिक तरह की दवाएं और दूसरे उत्पाद तैयार होते हैं.

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