अमेरिकी संगठन भारत के हक में कही ये बड़ी बात, जानकर हर देशवासी को होगा गर्व

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नई दिल्ली- इंटरनेशल डेस्क : बीते चार वर्षों में मोदी सरकार ने कई ऐसी योजनाएं बनाई हैं, जिनसे देश में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की सामाजिक और आर्थिक उन्नति में मदद मिली है। चाहे शिक्षा की बात हो, चाहे स्वास्थ्य की बात हो या फिर आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर होने की बात, हर कदम पर मोदी सरकार ने अल्पसंख्यकों को ध्यान में रख कर कार्य किया है।

मोदी सरकार के इन कार्यों पर अब एक अमेरिकी संगठन ने भी मुहर लगाई है। मालूम हो कि भारत के लिए यह रिपोर्ट इसलिए खास है, क्योंकि दुनिया के कई नेता हिन्दुस्तान की छवि खराब करने को लेकर बयान देते रहे हैं। साल 2009 और 2015 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि भारत अल्पसंख्यकों के लिए सुरक्षित नहीं है। उनके इस बयान के चलते दुनिया में भारत की बदनामी हुई थी। इसके अलावा चीन और पाकिस्तान भी अल्पसंख्यकों को लेकर भारत के खिलाफ बयानबाजी करता रहता है।

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भारत में अल्पसंख्यकों को ‘अभूतपूर्व’ सुविधाएं

अमेरिका स्थित एक हिंदू अधिकार समूह की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत सरकार धार्मिक अल्पसंख्यक आबादी को ‘अभूतपूर्व’ सुविधाएं देती है. समूह के मुताबिक भारतीय क्षेत्र में स्थिरता के लिये यह एक बड़ी वजह है। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (एचएएफ) ने ‘भारत: विविधता में लोकतंत्र’ शीर्षक वाले अपने हालिया संक्षिप्त नीति विवरण में कहा कि क्षेत्र में व्यापक स्थायित्व लाने और कट्टरपंथी इस्लामी तथा कम्युनिस्ट/माओवादी आतंकवाद को लगाम लगाने के लिये यह कितना जरूरी है और इसे इस बात से समझा जा सकता है कि अमेरिका लगातार भारत के साथ अपने रिश्तों को मजबूत बना रहा है।

चार प्रमुख धर्मों की जन्मस्थली है भारत

अमेरिकी संसद में जारी किए गए इस नीतिगत दस्तावेज में भारत के सदियों पुराने बहुधर्मी और बहुजातीय दर्जे को रेखांकित करने के साथ ही उसके महत्व को भी दर्शाया गया है। इसके साथ ही दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि भारत दुनिया के चार प्रमुख धर्मों की जन्मस्थली है और कई दूसरे धर्मों व जातियों के लिये शरणस्थली भी। रिपोर्ट में इस बात का भी विस्तार से जिक्र है कि कैसे मोदी सरकार ने ‘‘अपनी धार्मिक अल्पसंख्यक आबादी को अभूतपूर्व सुविधाएं दीं’’ । रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2016-17 में भारत की धार्मिक अल्पसंख्यक आबादी को 60 करोड़ अमेरिकी डॉलर से ज्यादा की योजनाओं से लाभान्वित किया गया।

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मोदी सरकार ने दी अल्पसंख्यक छात्रों को बड़ी सौगात

नरेन्द्र मोदी सरकार की तमाम नीतियों में मुस्लिम एवं अल्पसंख्यक वर्ग के हितों का पूरा-पूरा ध्यान रखा जाता है। प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में केंद्र सरकार सबका साथ, सबका विकास के मंत्र पर काम कर रही है। इसी सोच के साथ मोदी सरकार ने अल्पसंख्यक छात्रों को प्री-मैट्रिक, पोस्ट-मैट्रिक और प्रतिभा के आधार पर दी जाने वाली छात्रवृत्तियों की अवधि दो साल के लिए बढ़ा दी है। अब इन छात्रवृत्तियों की अवधि 2017-18 से बढ़ाकर 2019-20 कर दी गयी है। इससे हर साल 70 लाख छात्रों को छात्रवृत्ति मिलने की उम्मीद है और इसपर 5,338.32 करोड़ रुपये खर्च होगा। मोदी सरकार के अब तक के कार्यकाल में एक करोड़ 66 लाख अल्पसंख्यक बच्चों को छात्रवृत्तियां दी जा चुकी हैं। इनमें ज्यादातर बच्चे मुस्लिम समुदायों से हैं जबकि छात्रवृत्ति प्राप्त करने वालों में आधी लड़कियां हैं। ये योजनाएं राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (एनएसपी) के माध्?यम से लागू की जाएंगी और छात्रवृतियों का वितरण प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीपी) के रूप में किया जाएगा।

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मोदी सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के विकास के लिए उठाए गए 10 बड़े कदम

  • सीखो और कमाओ योजना
  • प्रोग्रेस पंचायत योजना
  • उस्ताद योजना
  • यूएसटीटीएडी – परंपरागत कलाओं के विकास और प्रशिक्षण का उन्नयन
  • उड़ान योजना
  • नए शिक्षा और कौशल विकास केंद्रों की स्थापना
  • थ्री ई – एजुकेशन, इम्पलायमेंट एवे इम्पावरमेंट
  • नई रोशनी योजना
  • मुस्लिम लड़कियों के लिए शादी ‘शादी शगुन’ 51,000 रुपये 
  • टॉयलेट, टिफिन और टीचर