प्राइवेट स्कूलों को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला, इस प्रस्ताव को मिली मंजूरी

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लखनऊ- न्यूज टुडे नेटवर्क : देखा जा रहा है कि अधिकतर प्राइवेट स्कूलों पर मनमाने तरीके से फीस बढ़ाते हैं, कुछ जिलों में स्थिति ऐसी देखने को मिली की कि स्कूल में ही किताब और ड्रेस बेचने वाली दुकानें धड़ल्ले से चल रही हैं। दूसरी ओर स्कूल प्रबंधन अपने हिसाब से फीस बढ़ोत्तरी कर रहे हैं, जबकि फीस बढ़ोत्तरी के लिए अभिभावकों की समन्वय कमेटी से पास कराना जरूरी है, लेकिन स्कूल प्रबंधन मनमानी कर जबरन फीस बढ़ा देते हैं।
निजी स्कूलों की इस मनमानी से अभिभावकों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। जिसके चलते उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस वसूली को लेकर एक अहम प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सरकार का दावा है कि इस विधेयक के अमल में आने के बाद निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने में सफलता मिलेगी। उप्र सरकार के कैबिनेट मंत्री और सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा और उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने पत्रकारों को इसकी जानकारी दी।

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मनमानी फीस बढ़ाते हैं स्कूल

पिछले कई वर्षों से देखा जा रहै कि अधिकतर प्राइवेट स्कल मनमानी तरीके से फीस बढ़ाते रहते हैं, जिसके चलते उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पास किये गए इस प्रस्ताव के तहत अब प्राइवेट स्कूल हर साल सिर्फ 7-8 फीसदी ही फीस बढ़ा सकेंगे। इसके साथ ही 12वीं क्लास तक स्कूल सिर्फ एक बार ही एडमिशन फीस ले सकेंगे। इसके अलावा प्रस्ताव के अनुसार अब प्राइवेट स्कूल सिर्फ चार तरह की ही फीस ले सकेंगे जिसमें विवरण पुस्तिका शुल्क, प्रवेश शुल्क, परीक्षा शुल्क और संयुक्त वार्षिक शुल्क शामिल होगा।

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स्कूल ड्रेस के लिए ये है प्रस्ताव

यूपी सरकार द्वारा मंजूर किये गए इस प्रस्ताव के मुताबिक कोई भी स्कूल अब पांच साल तक ड्रेस में बदलाव नहीं कर सकेगा। इसके साथ ही ड्रेस या फिर जूते और मोजे लेने के लिए स्कूलों द्वारा किसी भी स्टूडेंट को किसी दुकान के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा। यूपी सरकार के यह प्रस्ताव पैरेंट्स के लिए बहुत ही राहत भरा नजर आ रहा है, अब देखना ये है कि इस प्रस्ताव को कितना अमल में लाया जाता है।

शिक्षा व्यवस्था बदलने की तैयारी

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से बदलना चाहती है और इसके लिए उसने तैयारी भी शुरू कर दी है। प्रदेश सरकार यूपी बोर्ड को भी सीबीएसई बोर्ड की तरह एनसीइआरटी पैटर्न पर लाने के लिए योजना बन रही है। आपको बता दें कि यूपी बोर्ड के पैटर्न को एनसीईआरटी पैटर्न पर किए जाने से प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले यूपी के लाखों छात्रों को काफी राहत मिलेगी। डिप्टी सीएम डॉ दिनेश शर्मा के मुताबिक सरकार यूपी में एनसीईआरटी पैटर्न पर पाठ्यक्रम निर्धारित करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसके साथ ही शिक्षा माफिया का दखल खत्म करने के लिए स्वकेंद्र प्रणाली समाप्त करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके साथ ही नए स्कूलों की मान्यता पर रोक लगाने और नया शैक्षिक कैलेंडर लागू करने की भी तैयारी जोरों पर है।

और कड़े होंगे नियम

उत्तर प्रदेश में नए स्कूलों को माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी यूपी बोर्ड मान्यता नहीं देगा। सीएम योगी का यह आदेश पूरी प्रदेश में प्रभावी हो गया है। आपको बता दें कि योगी सरकार इस कदम से व्यवसाय बन चुकी शिक्षा व्यवस्था पर लगाम लगाने की कोशिश में है। अब मान्यता दिए जाने के नियमों में और कड़ाई बरती जाएगी जिसमें मानक तय होने के बाद ही अगला आदेश आएगा। जिसके चलते मानक और कठोर हो जाएंगे। जिसमें फीस निर्धारण, स्कूल में बेहतर सुविधा, बिजली, पानी, शौचालय, टीईटी और बीएड पास शिक्षक, भूकंपरोधी स्कूल के कमरे, खेल मैदान समेत कई निए नियम बोर्ड से मान्यता के लिए आवश्यक होंगे।