हल्द्वानी- महिलाओं और बुजुर्गों के हक में बने हैं ये कानूनी अधिकार, ऐसे उठाएं इनका फायदा

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हल्द्वानी: न्यूज टुडे नेटवर्क भारतीय संविधान के अनुसार देश के हर नागरिक का अधिकार है कि वह न्याय हासिल करे। इस काम के लिए न्याय पालिका पूरी तरह सजग है। आम गरीब तबके को तुरंत, सस्ता एवं निशुल्क न्याय मिले इसके लिए भी न्याय पालिका मे विशेष व्यवस्था की गई है। यह विचार राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रानीबाग में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर में सिविल जज सीनियर डिवीजन एवं प्राधिकरण सचिव निहारिका मित्तल गुप्ता ने व्यक्त किये।

महिलाएं कैसे उठाएं विधिक सेवाओं का लाभ

अपने सम्बोधन में उन्होंने कहा कि कानून की जानकारी ना होने की वजह से हमारा उत्पीड़न होता है खास तौर पर महिलाये जिनके लिए कई विघिक कानून बनाये गये है को जानकारी ना होने के कारण वह शोषण का शिकार हो जाती है। प्राधिकरण का उददेश्य है कि वह गांव-गांव जाकर इस प्रकार के शिविरों का आयोजन कर लोगों के साथ ही महिलाओं को जागरूक करे ताकि लोग ज्यादा से ज्यादा संख्या मे विधिक सेवाओं का लाभ उठा सकें।

उन्होने बहादुर महिलायें उत्तराखण्ड की शान है उत्तराखण्ड राज्य के सृजन मे महिलाओं का विशेष योगदान रहा है। वैसे भी हमारे देश मे 50 प्रतिशत जनसंख्या महिलाओं की है इसलिए महिलाओ के उत्थान एवं उनको आर्थिक सामाजिक और राजनैतिक न्याय उपलब्ध कराने के लिए उनके अधिकारों से अवगत कराया जाना राष्ट्र हित में अति आवश्यक है। उन्होेने कहा उत्तराखण्ड मे पुरूषो ने अधिकतर संख्या सेना मे रहकर राष्ट्र की रक्षा की है। और यहां की महिलाये घर की सुरक्षा करती है। इसलिए उत्तराखण्ड की महिलाओ को विधि के अन्तर्गत अधिकारों की जानकारी देकर अधिक सुदृढ बनाने की आवश्यकता है।

6 महीने के भीतर करें एफआईआर

प्राधिकरण सचिव निहारिका ने कहा कि आज के समय मे बच्चियों महिलाओ यहां तक कि बुजुर्ग महिलाओ के साथ बलात्कार एवं दुव्र्यवहार की घटनाओं में बढोत्तरी हुई है। उन्होंने शिविर में मौजूद महिलाओं से कहा कि वह समस्या से निपटने के लिए कानून का सहारा लें। पीडित महिला को हर हाल में 6 माह के भीतर सम्बन्धित थाने में एफआईआर दर्ज करानी चाहिए यदि किसी थाने मे एफआईआर दर्ज नही होती है तो उसकी लिखित जानकारी प्राधिकरण को देनी चाहिए। प्राधिकरण ऐसे मामलो को 60 दिन के भीतर न्याय करने के साथ ही पीडिता को उसकी स्थिति के अनुसार आर्थिक मदद भी करता है।

मानसिक रोगियों और बुजुर्गों के हैं अधिकार

मानसिक रोगियों के लिए 1987 मे विधिक कानून बनाया गया है। उन्होंने कहा कि परिवार में मानसिक रोगियों, बच्चो एवं बुजुर्गो को घरों में कैद कर देते है ऐसे लोगो के लिए भी कानून बनाये गये है। उनका बेहतर ईलाज व उनके भोजन आदि की व्यवस्था करना आदि भी हमार दायित्व है। इसके साथ ही वृद्वजनो की देखभाल और उन्हे परिवारिक माहौल देने के लिए भी कानून बनाये गये है कोई भी वृद्व महिला या पुरूष अपने बेटे,बेटी एवं पुत्रबधु से गुजारे के लिए धनराशि की मांग कर सकता है।

इसके साथ ही रेलवे,वायुसेवा व बस सेवा मे भी 60 वर्ष से ऊपर वृद्वजनो के लिए विशेष रियायतें है। यदि परिवहन सेवा, रेल सेवा बस सेवा के अलावा डाकघर, बिजली, सडक पानी स्कूल, इंस्योरैन्स कम्पनी से किसी भी प्रकार की शिकायत हो तो उसके लिए जिला मुख्यालय पर स्थायी लोक अदालत का गठन किया गया है जहां पर कोई भी पीडित व्यक्ति अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। शिकायत कर्ता को किसी भी प्रकार के वकील की आवश्यकता नही होगी, बल्कि लिखित मे एक आवेदन लोक अदालत में प्रस्तुत करना हेागा। ऐसे मामलो मे भी प्रभावित व्यक्ति को तत्काल सुलभ न्याय दिया जाता है।

ये रहे मौजूद

विधिक शिविर में ग्राम प्रधान आनन्द कुंजवाल, संजय साह, दिनेश चन्द्र जोशी, सुरेश चन्द्र पाठक, मदन मेहरा, कनक चंद, जानकी, दीपा, रमा पाण्डे के अलावा बडी संख्या में महिलायें मौजूद थी। कार्यक्रम का संचालन खष्टी बल्लभ जोशी द्वारा किया गया।