फुटबाल खिलाडय़िों के अजब-गजब अंधविश्वास, जीत के लिए आजमाते हैं ये टोटके

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नई दिल्ली – न्यूज टुडे नेटवर्क : विश्व कप में भाग ले रहे फुटबालरों के अनूठे अंधविश्वास भी हैरान कर देने वाले हैं मसलन किसी का मानना है कि लकी अंडरवियर पहनने से कामयाबी मिलेगी तो कोई डाइटिंग और वर्जिश के जरिये कामयाब होना चाहता है। कोई नमक छिडक़ता है, तो कोई बाल संवारता है। कोई दाहिना पैर उठाता, तो कोई जमीन चूमता। विज्ञान चाहे कुछ भी कहे, खिलाडय़िों से लेकर टीम के कोच तक मैच जीतने के लिए न सिर्फ खेल कौशल पर, बल्कि इन बातों पर भी विश्वास जताते हैं।खिलाड़ी और कोचों में अंधविश्वास का आलम यह है कि वे सफल होने के लिये हर दाव आजमाना चाहते हैं।

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क्रिस्टियानो रोनाल्डो बसे की पीछे की सीट पर बैठते हैं

पुर्तगाल के स्टार स्ट्राइकर क्रिस्टियानो रोनाल्डो अपनी मान्यताओं को पूरा करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। रियाल मैड्रिड की टीम बस में वह हमेशा सबसे पीछे बैठते हैं। वहीं प्लेन में वह सबसे आगे की सीट लेते हैं। फुटबॉल फील्ड में वह हमेशा दाहिना पैर उठा कर घुसते हैं। इतना ही नहीं हाफ टाइम में वह अपने बाल जरूर संवारते हैं। इन सब के पीछे क्या कारण हैं, ये तो रोनाल्डो हीं जानते हैं।

रेने को नीली अंडरवियर पर भरोसा

कोलंबिया के गोलकीपर रेने हिगुइटा का मानना है कि नीली अंडरवियर पहनने से उन्हें कामयाबी मिलेगी तो जर्मन स्ट्राइकर मारियो गोमेज मैच से पहले एकदम बायीं ओर बनी टायलेट इस्तेमाल करते हैं। गोमेज के साथी खिलाड़ी जूलियन ड्राक्सलेर बड़े मैच से पहले उन्हें परफ्यूम लगाते हैं।

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मार्शेलो मैदान पर दायां कदम पहले रखते हैं

खेल मनोवैज्ञानिक डान अब्राहम्स ने कहते हैं, हर खिलाड़ी मैच से पहले कोई नियम रखता है। आम तौर पर इनका प्रदर्शन से कोई सरोकार नहीं होता लेकिन खिलाडय़िों को ऐसा लगता है। इंग्लैंड के फिल जोंस जैसे कुछ खिलाड़ी सफेद लाइन पर चलना पसंद नहीं करते जबकि ब्राजील के डिफेंडर मार्शेलो हमेशा पिच पर पहले दायां कदम रखते हैं।

रेनार्ड को सफेद कमीज पसंद

मोरक्को के हर्व रेनार्ड सफेद कमीज पहनते हैं जिससे उन्हें अफ्रीकी कप आफ नेशंस में तो सफलता मिली लेकिन विश्व कप में नहीं। फ्रांस की 1998 विश्व कप टीम के खिलाड़ी मैच से पहले गोलकीपर के गंजे सिर पर हाथ फेरते थे। डिफेंडर लारेंट ब्लांक हर मैच से पहले बार्थेज के सिर पर चुंबन देते थे।

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मारियो जगालो 13 नंबर की सर्जी पहनते थे

ब्राजील के पूर्व खिलाड़ी और कोच मारियो का 13 नंबर के साथ अटूट प्रेम था। मिस्र के सेंट एंटोनी की मारियो पूजा करते थे। मारियो एक बिल्डिंग के 13वें माले पर रहते थे। उन्होंने महीने की 13 तारीख को शादी की थी। जब वह फुटबॉल खेलते थे, तो हमेशा 13 नंबर की जर्सी पहनते थे। साल 1994 में मारियो की कप्तानी में ब्राजील की टीम ने विश्वकप अपने नाम किया था।

कार्लोस बिलार्डो की टीम को चिकन से परहेज

1986 में अर्जेंटीना के कप्तान कार्लोस बिलार्डो ने अपनी टीम को पोल्ट्री आइटम मसलन चिकन, अंडे आदि खाने से मना कर दिया था। वे इसे अपशगुन मानते थे। वह हर मैच से पहले खिलाडिय़ों को टूथपेस्ट के ट्यूबों का आदान-प्रदान करने के लिए भी कहते, क्योंकि उन्होंने जिस मैच के पहले एक साथी खिलाड़ी से टूथपेस्ट उधार ली थी, टीम वह मैच जीत गई थी। खैर, अर्जेंटीना विश्वकप तो जीत ही गया था।

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सर्जियो खावियर गोइकोचेया पिच पर करते थे पेशाब

1990 के विश्वकप में अर्जेंटीना के खिलाड़ी सर्जियो ने विपक्षी टीम के पेनल्टी किक को रोकने के लिए फील्ड में पेशाब करना अपनी आदत बना लिया था। यह विपक्षी टीम को असहज करने का एक तरीका था। अर्जेंटीना के इस खिलाड़ी की यह ट्रिक फाइनल मैच में पहुंचने तक तो कामयाब रही। लेकिन फाइनल में जर्मनी ने अर्जेंटीना को 1-0 से हरा कर ट्रॉफी अपने नाम कर ली।

लोरां साथी खिलाड़ी फाबियान के गंजे सिर को चूमते

लोरां कई साल तक फ्रांस की टीम की कप्तानी संभालते रहे। हर अंतरराष्ट्रीय मैच के पहले वह अपने साथी खिलाड़ी फाबियान बार्थेज के गंजे सिर को चूमते। शायद यह टीम के लिए गुडलक लेकर आया। इसके बाद टीम कई मैच जीती, जिसके चलते टीम के अन्य खिलाड़ी भी फाबियान के सिर पर चूमने लगे। फिर क्या, सारे खिलाड़ी मैच के पहले फाबियान के गंजे सिर को चूमने के लिए लाइन लगा कर खड़े हो जाते।

बास्टियान श्वाइनश्टाइगर

साल 2014 के फुटबॉल विश्वकप के हीरो रहे बास्टियान आज भी करिश्माई खेल के जादूगर माने जाते हैं। पूर्व जर्मन कप्तान अब अमेरिका की शिकागो फायर क्लब के लिए खेलते हैं। बास्टियान गीले मोजे और जूते पहनकर खेलते थे। उन्हें लगता था कि इससे उनकी टीम मैच जीत जाएगी।