नई दिल्ली- Car और Bike खरीदने की सोच रहे हैं तो जरूर जान लें सुप्रीम कोर्ट का ये आदेश, वरना पड़ जाएंगे लेने के देने

110
Facebooktwittergoogle_pluspinterest

नई दिल्‍ली- न्यूज टुडे नेटवर्क: अगर आप कार और बाईक लेने की सोच रहे हैं तो यह खबर आपके ही मतलब की है। 01 सितंबर 2018 से कार खरीदने के साथ 2 साल और मोटरसाइकिल के साथ 5 साल का थर्ड पार्टी मोटर इंश्‍योरेंस खरीदना अनिवार्य कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस बाबत आदेश जारी करते हुए भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) से इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी करने को कहा है।

अब तक सिर्फ दोपहिया वाहनों के लिए ही 1 साल से अधिक अवधि वाला बीमा कवर बाजार में मिल रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा पर अदालती कमेटी की सिफारिशों का उल्‍लेख करते हुए यह नियम अनिवार्य किया है। दरअसल कमेटी ने सिफारिश की थी कि दोपहिया या चौपहिया वाहनों की बिक्री के समय थर्ड पार्टी इंश्‍योरेंस कवर 1 साल की जगह क्रमश: 5 साल और 2 साल के लिए अनिवार्य जाए। जानकारी के मुताबिक फिलहाल देश में सिर्फ 45 फीसदी बाइक व स्‍कूटर ही बीमित हैं जबकि 70 फीसदी कार इंश्‍योर्ड हैं।

 

जानें क्या होता है थर्ड पार्टी इंश्‍योरेंस

मोटर वाहन अधिनियम के मुताबिक सड़क पर दौड़ रहे सभी वाहनों का थर्ड पार्टी वाहन बीमा होना अनिवार्य है। हर पॉलिसी में दो हिस्‍से होते हैं-थर्ड पार्टी कवर व ओन डैमेज। देश में सभी वाहनों के लिए थर्ड पार्टी कवर अनिवार्य है। यह वाहन से किसी थर्ड पार्टी को नुकसान की भरपाई करता है। यह ओनर के वाहन को पहुंची क्षति को कवर नहीं करता। थर्ड पार्टी इंश्‍योरेंस कवर का प्रीमियम प्रत्‍येक वर्ष IRDA तय करता है।

मोटर व्हीकल एक्ट में होगा ये बड़ा बदलाव

इसके अलावा केंद्र सरकार जल्द ही मोटर व्हीकल नियमों में बदलाव करने जा रही है। डिजिटल इंडिया के तहत मोटर व्हीकल एक्ट को भी डिजिटाइज्ड करने की योजना है। यही वजह है कि अब आपको ड्राइविंग लाइसेंस, गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और इंश्योरेंस साथ लेकर नहीं चलना होगा।

मोटर व्हीकल नियम में बदलाव होने के बाद ट्रैफिक कंट्रोलर्स गाड़ियों के सभी दस्तावेजों का डिजिटल वर्जन स्वीकार करेंगे। इसमें रजिस्ट्रेशन, गाड़ी का इंश्योरेंस, पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट और ड्राइविंग लाइसेंस शामिल हैं। सड़क परिवहन मंत्रलाय जल्द ही इस मामले में एडवाइजरी जारी कर सकता है।