बहुत जल्द ही खत्म हो जाएगा बुआ-बबुआ के बीच गठबंधन !

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लखनऊ-न्यूज टुडे नेटवर्क : उत्तर प्रदेश में बसपा प्रमुख मायावती और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच हुए गठबंधन की शर्तें अब सामने आ रही हैं। दोनों पार्टियों के बीच हुआ गठबंधन सिर्फ मई 2019 चुनावों तक के लिए ही रहेगा। अखिलेश की सपा सरकार जहां 35 सीटों पर चुनाव लड़ेगी वहीं मायावती की बसपा पार्टी 45 सीटों पर चुनाव लड़ती देखाई देगी। वहीं दूसरी तरफ 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियां अलग-अलग दिखाई देंगी।

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बरकारार रखना चाहते हैं अखिलेश गठबंधन

एक तरफ अखिलेश इस गठबंधन को बरकरार रखना चाह रहे हैं वहीं दूसरी तरफ मायावती इसके लिए तैयार नहीं हैं। दोनों पार्टियों के बीच कैराना लोकसभा सीट को लेकर अन-बन हुई थी। इस सीट पर रालोद नेता जयंत चौधरी चुनाव लडऩा चाहते थे। इस मामले पर बात चीत करने के लिए अखिलेश ने उन्हें लखनऊ में आमंत्रित किया था लेकिन मायावती ने वहां न जाते हुए पत्र से जवाब दिया कि सीट पर एक महिला मुस्लिम नेता को टिकट दी जाए जो रालोद के चुनाव चिन्ह पर लड़ सके।

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दोनों ही दल एक दूसरे के धुर विरोधी के तौर पर देखे जाते हैं

मायावती चाहती हैं कि जाटों के साथ-साथ महिला और मुस्लिम वोट भी मिले और इसके लिए रालोद तैयार भी हो गई है। वहीं ये बात भी तय है कि रालोद बीजेपी के साथ नहीं जाएगा। लेकिन बहुत ही कम लोगों को पता है कि सपा-बसपा के बीच गठबंधन के पीछे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अहम योगदान निभाया है।