SC के इन 4 वरिष्ठ जजों ने CJI पर लगाए ये 5 बड़े गंभीर आरोप, जिसके बाद देश में मचा हड़कंप…

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भारत के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के चार मौजूदा वरिष्ठ न्यायाधीश ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की है. ये प्रेस कॉन्फ्रेस चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा के बाद सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम जज जस्टिस जे चेलमेश्वर के घर पर हुई. जस्टिस चेलमेश्वर के साथ इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसफ भी मौजूद थे.

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को मिलने के लिए बुलाया.

चीफ जस्टिस पर पांच बड़े आरोप

-चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया केसों के बंटवारे में नियमों की अनदेखी कर रहे हैं.
-चीफ जस्टिस परंपरा से बाहर हो रहे हैं जिसमें महत्वपूर्ण मामलों में सामूहिक निर्णय लिए जाते हैं.
-वो महत्वपूर्ण मामले जो सुप्रीम कोर्ट की अखंडता को प्रभावित करते हें वो बिना किसी वाजिब कारण के उन बेंचो को देते हैं तो चीफ जस्टिस की प्रेफेरेंस की हैं. इसने संस्थान की छवि खराब की है.
-तमाम समस्याओं को लेकर सीजेआई को चिट्ठी लिखी गई थी लेकिन उसका कोई जवाब नहीं दिया गया.
-सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्‍था सही नहीं चल रही, इस संबंध में हमारे सभी प्रयास बेकार गए.

चिट्ठी में कई मुद्दों की तरफ दिलाया ध्यान

-सुप्रीम कोर्ट 24 जजों के साथ काम कर रहा है, जबकि यह संख्या 31 होनी चाहिए.
-हाईकोर्ट में 1079 जजों के पद स्वीकृत हैं जिनमें से 458 खाली हैं.
-जजों के पद खाली होने के कारण मुकदमों का बोझ बढ़ता ही जा रहा है.
-सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने उतराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के एम जोसफ और सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील इंदू मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त करने की सिफारिश भेजी है.
-जस्टिस के एम जोसफ ने ही हाईकोर्ट में रहते हुए 21 अप्रैल 2016 को उतराखंड में हरीश रावत की सरकार को हटाकर राष्ट्रपति शासन लगाने के फैसले को रद्द किया था.

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