नई दिल्ली- इलेक्ट्रिक कार के बाद अब इलेक्ट्रिक बैटरी पर मिलेगी सब्सिडी, बस करना है ये छोटा का काम

इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) के बाद अब सरकार का फोकस बैटरी मैन्युफैक्चरिंग पर होने वाला है। लिथियम ऑयन बैटरी की मैन्युफैक्चरिंग पर सरकार सब्सिडी देने की योजना लेकर आई है। इसके लिए सरकार बैटरी मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी लाई है। पॉलिसी के मुताबिक, सरकार प्रति किलोवॉट ऑवर 2,000 रुपये की सब्सिडी देगी। इसका मतलब ये होगा कि एक
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नई दिल्ली- इलेक्ट्रिक कार के बाद अब इलेक्ट्रिक बैटरी पर मिलेगी सब्सिडी, बस करना है ये छोटा का काम

इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) के बाद अब सरकार का फोकस बैटरी मैन्युफैक्चरिंग पर होने वाला है। लिथियम ऑयन बैटरी की मैन्युफैक्चरिंग पर सरकार सब्सिडी देने की योजना लेकर आई है। इसके लिए सरकार बैटरी मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी लाई है। पॉलिसी के मुताबिक, सरकार प्रति किलोवॉट ऑवर 2,000 रुपये की सब्सिडी देगी। इसका मतलब ये होगा कि एक इलेक्ट्रिक व्हीकल में एक बड़ा हिस्सा बैटरी खर्च को लेकर है। लिथियम बैटरी पर सब्सिडी से इलेक्ट्रिक व्हीकल की कीमत कम हो जाएगी। यह सब्सिडी इलेक्ट्रिक व्हीकल पर मौजूदा छूट के अलावा होगी।

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54 गीगा वॉट की बैटरी मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी बनाने का लक्ष्य

इस पॉलिसी के अंदर सरकार अगले तीन साल में 54 गीगा वॉट की बैटरी मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी बनाना चाहती है। सरकार उन्हीं कंपनियों को सब्सिडी देगी जो कम से कम 5 गीगा वॉट से लेकर 20 गीगा वॉट के बीच की फैक्ट्री लगाना चाहते हैं।

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700 करोड़ रुपये का आएगा खर्च

बैटरी सब्सिडी पर हर साल करीब 700 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इसके अलावा एक बैटरी को बनाने में जो चीजें इस्तेमाल होती हैं, उसके इम्पोर्ट पर जीरो ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव रखा है। साथ ही डेप्रिसिएशन का प्रस्ताव रखा गया है। पॉलिसी में कई तरह के प्रस्ताव हैं जिससे बैटरी की कीमत कम की जा सकेगी। एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमिटी पहले इसके मंजूरी देगी और फिर उसके बाद कैबिनेट के पास जाएगा।