मास्को- दु:खद – जलते मॉल के बीच चौथे मंजिल से कूद गया ये 11 साल का मासूम, हुआ कुछ ऐसा…जान तो बच गई पर दुनिया उजड़ गई

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मॉस्को- न्यूज टुडे नेटवर्क: मॉस्को में केमेरोवो मॉल के अंदर लगी भीषण आग ने सभी का दिल दहला कर रख दिया। भयावह अग्निकांड में 11 बच्चों सहित 64 लोगों की मौत हो गई, जबकि काफी के लापता होने की खबर है। रूसी जांच समिति की प्रवक्ता स्वेतलाना पेट्रेंकों ने बताया कि सोमवार (26 मार्च) सुबह शव बरामद कर लिए गए। समाचार एजेंसी तास ने बताया कि विंटर चेरी मॉल (जिमवाया विश्नाया) की चार मंजिला इमारत की ऊपरी मंजिल पर रविवार दोपहर को आग लग गई और इसने इमारत के करीब 1,500 से वर्ग मीटर से अधिक के हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। ऐसे में अब जलते हुए मॉल के कई फुटेज सामने आ रहे हैं। इसी तरह के एक फुटेज में एक 11 वर्ष के लड़के को जलते हुए मॉल के चौथे मंजिल की खिड़की से बाहर कूदते हुए देखा जा रहा है। उसने खिड़की से नीचे कूद कर इस तरह अपनी जान बचाई। डॉक्टरों के अनुसार हालांकि इस समय वह कोमा में हैं।

मासूम के सिर से छिना माँ-बाप का साया

आग की लपटों से बचने के लिए चौथी मंजिल से छलांग लगाने वाले 11 वर्षीय सर्गे मॉसकालेंको की दादी के मुताबिक 4 सदस्यों वाला यह परिवार एक हैट खरीदने के लिए रविवार को शॉपिंग मॉल गए थे। बच्चे को वे प्ले एरिया में छोड़ शॉपिग करने लग गए थे जिस समय वहां आगजनी की घटना हुई थी।

मॉस्को में केमेरोवो मॉल के अंदर लगी भीषण आग के बाद उठता धुंआ

वीडियो में ये दिखाया गया है कि एक बच्चा मॉल के चौथी मंजिल की खिड़की से बाहर आ रहा है जहां से गहरा काला धुंआ निकल रहा था। खिड़की पर वह कुछ देर तक रुका और फिर उसने वहां से नीचे की तरफ छलांग लगा दी। नीचे कूदते समय वह वहां लगे माउंटेड लैंप से टकरा गया। वहां से सीधे वह जमीन पर पेट के बल गिर गया। लोगों ने उसे चिल्लाते हुए देखा तो उसकी तरफ भागे।

अपने माता -पिता के साथ 11 साल का मासूम सर्गे , लाल जैकेट में (फाईल फोटो)

डॉक्टरों ने कहा कि सर्गे बेहोश था लेकिन वह अपना नाम बता सकता था। उसने सभी से यह भी कहा कि उसके माता-पिता अभी भी मॉल के अंदर फंसे हुए हैं। इसके बाद वह कोमा में चला गया। उसकी हालत अब भी गंभीर है। उसके दिल, फेफड़े, किडनी पर गहरा आघात हुआ है। उसके गालों पर गहरी चोट आई साथ ही उसकी श्वास नली भी गहरे धुंएं के कारण जल गई है। लेकिन उसकी हालत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।

लेकिन इस सबके बीच 11 साल के इस मासूम के हिस्से में जिंदगी भर का दर्द भी आ गया। दरअसल अग्निकांड में सर्गे के माता-पिता की जलकर मौत हो गई है। ऐसे में अब घर में बूड़ी दादी ही सर्गे का सहारा हैं। और कहीं ना कही सर्गे भी अपनी बूड़ी दादी का आखिरी सहारा है। ऐसे में जबकि सर्गे जिन्दगी और मौत के बीच जूझ रहा है , उसकी बूड़ी दादी इस बात की हिम्मत नही जुटा पा रही है कि कैसे इस दुखद खबर को नन्हे सर्गे को बताएंगी। कुछ ऐसी ही दर्द भरी कहानी इस अग्निकांड में मौत के मुंह में समाए बाकी परिवारों की भी है।