उत्तराखंड- ‘गुरूजी’ की हिम्मत के आगे हर मुश्किल ने कुछ ऐसे टेके घुटने, इन पर है देवभूमि को नाज

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देहरादून: न्यूज टुडे नेटवर्क- अपने दर्द को नजरअंदाज कर कैसे नौनिहालों का भविष्य संवारा जाता है कोई आदर्श विद्यालय राइंका त्यूणी के हिंदी प्रवक्ता पूरण चौहान से सीखे। शारीरिक रूप से दिव्यांग जौनसार-बावर के रडू निवासी शिक्षक पूरण चौहान ने आज उन लोगों के लिए किसी नजीर से कम नही हैं जो मामूली बातों में हिम्मत हार हताश- परेशान हो जाते हैं।

teacher Pooran Chauhan
कुछ इस तरह लगती है शिक्षक पूरण चौहान की अनूठी क्लास

यह जानकर आप हैरान रह जाएंगे कि बच्चों का भविष्य संवारने की धुन में हर रोज घर से स्कूल तक शिक्षक पूरण चौहान व्हील चेयर में पहुंचते हैं। जौनसार के विख्यात कवि एवं साहित्यकार रतन सिंह जौनसारी को अपना आदर्श मानने वाले शिक्षक पूरण चौहान को साल 2008 में हिंदी साहित्य शिखर सम्मान के साथ ही ब्लॉक एवं जिला स्तर पर कई पुरूस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

बुलंद सोच से दी हर मुश्किल को मात

सीमांत तहसील त्यूणी के साधारण परिवार में जन्मे पूरण चौहान ने पांचवीं तक की पढ़ाई गांव के प्राइमरी स्कूल में की। 44 वर्षीय शिक्षक पूरण चौहान बताते हैं कि 15 साल की उम्र में मांसपेशियों में खिंचाव की वजह से वह चलने-फिरने में कठिनाई महसूस करने लगे। कई अस्पतालों में इलाज कराने के बाद भी जब स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं आया तो व्हील चेयर ही जीवन का सहारा बन गई।

भले ही पैरों ने पूरण चौहान का साथ ना दिया हो लेकिन माँ सरस्वती का आशीर्वाद उन्हें भरपूर मिला। यही वजह है कि बुलंद इरादों और अच्छी सोच के दम पर पूरण चौहान आज नौनिहालों का भविष्य संवार रहे हैं।

हौंसले के दम पर जब भरी उड़ान

भले ही होनी के आगे पूरण मजबूर हों लेकिन इस दौरान पूरण को परिजनों और इष्टमित्रों का भरपूर सहयोग मिला। यही वजह रही कि पूरण चौहान ने कभी भी पढाई से मुंह नही मोड़ा। पढाई के प्रति जुनून का ही कमाल था कि एमए हिंदी साहित्य के साथ पूरण ने यूजीसी नेट और यू-सेट की परीक्षा उत्तीर्ण की।

साल 2007 में उन्हें शिक्षा विभाग में नियुक्ति मिली और पहली पोस्टिंग खुद के ही गांव रडू के प्राइमरी स्कूल में हुई। यहां पूरण ने 4 साल तक गांव के बच्चों को बिना वेतन लिए पढ़ाया। साल 2017 से बतौर हिंदी प्रवक्ता प्रवीण चौहान आदर्श विद्यालय राइंका त्यूणी में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं।

साहित्य योगी हैं शिक्षक पूरण चौहान

अगर शिक्षक पूरण चौहान को साहित्य का योगी कहा जाए तो कुछ भी गलत नही होगा। स्कूल में बच्चों का भविष्य संवारने के साथ-साथ शिक्षक पूरण चौहान दर्जन भर पुस्तकों के रचयिता भी हैं। उनकी प्रमुख पुस्तकों में संयुक्त काव्य संग्रह अंतर्मन, धूप के रंग, मीठी सी तल्खियां (तीन भागों में), साहित्य रागिनी एवं प्रयास, मेधाली, एक आशियाना मेरा भी आदि पुस्तकें शामिल हैं।